उत्तर प्रदेशदेशबस्तीब्रेकिंग न्यूज़शिक्षास्वास्थ्य

नसों का असहनीय दर्द – (न्यूरेल्जिया) के लक्षण, कारण और उपचार

बस्ती से वेदान्त सिंह

 

 नर्वस सिस्टम की नाडियां (नर्स) नसें संपूर्ण शरीर में फैली रहती हैं। किसी भी कारण न से जब इन नसों पर दबाव पड़ता है, तो इनका कार्य बाधित होता है और नस में दर्द होता है, जिसे न्यूरेल्जिया नाम दिया जाता है। गरदन, पीठ, कमर, कलाई आदि किसी भी हिस्से की नस इससे प्रभावित हो सकती है।

न्यूरेल्जिया एक तकलीफदेह स्थिति होती है, जिसमें दर्द हल्का या तीखा (तेज) होता है। दर्द के साथ मांसपेशियों में संवेदनहीनता, रिफ्लेक्स में कमी, मांसपेशियों में सुखाव (शोष) की स्थिति भी बन सकती है। अतः इस प्रकार के दर्द को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मिलती है।

*प्रमुख लक्षण*

नसों व मांसपेशियों में दर्द, जलन की अनुभूति, संवेदनहीनता, पूरी नस में दर्द आदि लक्षण पाए जाते हैं।

मांसपेशियों की कार्यक्षमता का अभाव हो जाता है, संबंधित ऊतक, अंग या भाग की गति व कार्यप्रणाली बाधित हो जाती है, कार्य अवरुद्ध हो जाता है।

दर्द अचानक बहुत तेज कोई नुकीली वस्तु चुभने जैसा होता है, छूने या दबाने से दर्द महसूस होता है और बार-बार या लगातार दर्द होता है।

और सुन्नपन, हल्की सूजन, तेज दर्द, झनझनाहट, मांसपेशीय ऐंठन मांसपेशीय दुर्बलता मिल सकती है।

प्रभावित स्थान पर तीव्र दर्द होता है, क्योंकि दबाव या अवरोध से नस सिग्नल नहीं भेज पाती है।

त्वचा की असामान्य अनुभूति होती है और प्रभावित क्षेत्र में पसीना कम आता है, क्योंकि नस से पसीना नियंत्रित होता है।

गहरी टेंडन रिफ्लेक्शन में कमी हो जाती है और मांसपेशी का कम होना (पतला पड़ना) जैसा लक्षण भी मिलता है।

दबाने से नस के पास दर्द या सूजन महसूस होती है। ट्रिगर प्वाइंट या ऐसे स्थान पर हल्का-सा छूने से भी दर्द हो जाता है।

*प्रमुख कारण*

किसी भी औषधि का दुष्प्रभाव या केमिकल रिएक्शन न्यूरेल्जिया का कारण बन सकता है।

क्रॉनिक रीनल इनसफिशिएंसी के कारण न्यूरेल्जिया की स्थिति मिल सकती है।

लंबे समय तक मधुमेह रोगी की अनियंत्रित शुगर लेवल से नाही तंतुओं में शोथ होने के कारण भी न्यूरेल्जिया अस्त करता है।

किसी भी प्रकार का संक्रमण (इंफेक्शन), शिंगल्स डिजीज, सिफलिस, नजदीकी अंगों पर दबाव आदि कारणों से न्यूरेल्जिया की शिकायत हो सकती है।

नस के पास ट्यूमर, हड्डी या कॉर्टिलेज का दबाव पड़ने से न्यूरेल्जिया त्रस्त कर सकता है।

रक्त नलिकाओं का नस पर दबाव भी न्यूरेल्जिया का कारण बनता है।

नस में सूजन या चोट लगना, अचानक वजन उठाने से झटका लगना आदि कारणों से न्यूरेल्जिया की स्थिति मिल सकती है।

• कमजोर स्वास्थ्य, पोषक तत्वों की कमी आदि के कारण भी न्यूरेल्जिया का प्रकोप हो सकता है।

हर्नियेटेड डिस्क, आर्थराइटिस, बोन स्पर के कारण भी नसों पर दबाव आकर न्यूरेल्जिया त्रस्त कर सकता है।

गलत पॉश्चर में खड़े होने या बैठे रहने से भी नसों पर दबाव पड़ता है और न्यूरेल्जिया की स्थिति देखने को मिलती है।

*बचाव और उपचार*

जिस कारण से न्यूरेल्जिया हुआ हो, सर्वप्रथम उसे दूर करने का प्रयास करें।

यदि दांतों में संक्रमण हो, तो उसे दूर करने के लिए समुचित उपचार कराएं।

यदि ब्लड शुगर लेवल अधिक हो या अनियंत्रित हो, तो उसे नियंत्रित करें और लगातार नियंत्रण में ही रखें।

यदि नस पर दबाव (प्रेशर) पड़ रहा हो, तो फिजियोथेरापी से दबाव दूर करें। यदि इससे दबाव दूर नहीं होता हो, तो सर्जरी से दबाव डालने वाले ऑब्जेक्ट को हटाने का प्रबंध करें।

यदि शिंगल्स डिजीज में दर्द बहुत ज्यादा हो, तो दवा के इंजेक्शन से नस को ब्लॉक कर दिया जाता है, ताकि दर्द दूर हो और संक्रमण को कम किया जा सके।

*उपयोगी सुझाव*

प्रभावित हिस्से को आराम दें, ताकि नस पर दबाव न पड़े।

यदि गरदन में दर्द हो, तो कॉलर नेक लगाएं, ताकि गरदन सीधी रहे और खिंचाव कम हो।

यदि कमर दर्द हो, तो ट्रेक्शन लगवाएं, ताकि नस पर पड़ा दबाव कम हो। कटि बस्ति का प्रयोग भी अत्यंत ही लाभदायी है।

दर्द से प्रभावित भाग पर गरम-ठंडी सिंकाई करें, ताकि ब्लड सर्कुलेशन तेज होकर संक्रमण व सूजन दूर हो सके।

टहलना, तैरना आदि गतिविधियां करें, ताकि मांसपेशियों की निष्क्रियता दूर हो।

सही पॉश्चर में बैठें व खड़े हों, ताकि नस पर दबाव न बने।

यदि मोटापा हो, तो वजन को नियंत्रित करें।

आहार में कैल्शियम की कमी न हो, इसके लिए दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, केले आदि लें। कैल्शियम सप्लीमेंट अलग से भी लें। पैक्ड फूड में कैल्शियम फोर्टीफाइड है या नहीं यह चेक करके ही लें।

पोटाशियम की कमी से नसों के बीच के बंधन कमजोर हो जाते हैं। अतः इसकी कमी न होने दें। अखरोट, केला व सूखे मेवे पोटाशियम से भरपूर हैं। स्किम्ड मिल्क व ऑरेंज जूस से पोटाशियम के अवशोषण में मदद मिलती है। लेकिन यदि किडनी प्रॉब्लम हो, तो चिकित्सकीय सलाह के बिना पोटाशियम न लें।

योगाचार्य या फिजियोथेरापिस्ट की सलाह के बिना योगासन या एक्सरसाइज न करें।

सावधानी

यदि प्रभावित हिस्से में ठंडक महसूस हो अथवा हल्का पीला या नीला दिखायी दे, तो तुरंत चिकित्सक के पास जाएं।

यदि प्रभावित हिस्से में संज्ञाशून्यता या शीतलता हो, तो तुरंत चिकित्सक के पास जाएं।

यदि प्रभावित अंग सूखने लगे, (मांसशोष-मांसपेशियां सूखने लगें), अंग पतला पड़ जाए, तो तुरंत चिकित्सक के पास जाएं।

उपरोक्त स्थितियों में हमेशा के लिए वह अंग नष्ट हो सकता है, अतः चिकित्सक से यथाशीघ्र संपर्क करके समुचित उपचार का लाभ अवश्य प्राप्त किया जाना चाहिए।

*डॉ अर्चना दुबे*, अध्यक्ष

अखंड एक्यूप्रेशर रिसर्च ट्रेंनिंग एंड ट्रीटमेंट इंस्टीट्यूट, प्रयागराज

 *अधिक जानकारी के लिए आप हमें इंस्टाग्राम एवं यूट्यूब पर भी फॉलो कर सकते हैं*

मेरे चैनल है-

*अर्चना दुबे एक्यूप्रेशर*

*अर्चना दुबे हेल्थ लैब*

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

Related Articles

Back to top button