इफको ने शुरू किया देशव्यापी ‘नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान’, किसानों को मिलेगा नई तकनीक का लाभ
नई दिल्ली, 10 अप्रैल 2026।
भारत की सबसे बड़ी उर्वरक सहकारी संस्था इफको ने देशभर में ‘नैनो उर्वरक जागरूकता महा अभियान’ की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। इस अभियान का शुभारंभ इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने दिल्ली स्थित इफको सदन से 5 नैनो प्रचार वैन को हरी झंडी दिखाकर किया।
📌 19 राज्यों के 560 जिलों तक पहुंचेगा अभियान
इस मौके पर दिलीप संघाणी ने बताया कि यह व्यापक अभियान देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 560 जिलों और 3,477 तहसीलों में चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को नैनो उर्वरकों के फायदे और सही उपयोग के प्रति जागरूक करना है।
🌱 नैनो उर्वरकों को मिली सरकारी मान्यता
संघाणी ने बताया कि नैनो एनपीके लिक्विड (8-8-10) और नैनो एनपीके ग्रेन्युलर (20-10-10) को भारत के उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) में शामिल किया जाना कृषि क्षेत्र में एक बड़ा कदम है। इससे नैनो तकनीक को औपचारिक मान्यता मिली है।
🇮🇳 ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़ा कदम
यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की प्रेरणा से शुरू किया गया है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘सहकार से समृद्धि’ मिशन को मजबूती देगा।
🎯 अभियान के मुख्य उद्देश्य
नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, नैनो एनपीके, नैनो जिंक और नैनो कॉपर का प्रचार
किसानों को फोलियर स्प्रे के जरिए सही उपयोग का प्रशिक्षण
पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना
सहकारी नेटवर्क के जरिए गांव स्तर तक पहुंच
📊 बिक्री और बचत के बड़े आंकड़े
इफको के अनुसार—
218 लाख+ बोतल नैनो यूरिया प्लस
64.26 लाख+ बोतल नैनो डीएपी
नैनो जिंक (57 लाख) और नैनो कॉपर (2 लाख) की बिक्री
विशेष बात यह है कि नैनो यूरिया की 208.26 लाख बोतलें 9.37 लाख मीट्रिक टन पारंपरिक यूरिया के बराबर हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और आयात लागत में भारी बचत हुई है।
🌍 वैश्विक स्तर पर बढ़ती भारत की ताकत
इफको का कोयंबटूर स्थित इनोवेशन हब और ब्राज़ील में बनने वाला नैनो उर्वरक संयंत्र (जून 2026 तक संभावित) भारत की बढ़ती वैश्विक क्षमता को दर्शाता है।
🌾 किसानों के लिए फायदेमंद तकनीक
संघाणी ने कहा कि नैनो उर्वरक केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की सेहत सुधारने और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने इसे जनआंदोलन बनाने की अपील करते हुए कहा—
“कम लागत, हर खेत में नैनो उर्वरक, यही आत्मनिर्भर कृषि की दिशा है।”
👉 निष्कर्ष:
इफको का यह महा अभियान भारतीय कृषि में तकनीकी बदलाव लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ किसानों की लागत घटेगी बल्कि उत्पादन और पर्यावरण दोनों को फायदा मिलेगा।