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इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल दिल्ली (IFFD) में अनूठे फैशन शोकेस के माध्यम से ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की वैश्विक प्रस्तुति
‘द लूम एंड द लेंस: वीविंग स्टोरीज़, फ्रेमिंग लेगेसी’ ने IFFD 2026 में हैंडलूम और सिनेमा को एक मंच पर जोड़ा

दिल्ली से राहुल कुमार
नई दिल्ली :
इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल दिल्ली (IFFD) के अवसर पर दिल्ली पर्यटन, दिल्ली सरकार और भारत सरकार के विकास आयुक्त (हैंडलूम) के सहयोग से, शिखा’स करिगारी के साथ मिलकर एक भव्य और भावनात्मक फैशन शोकेस ‘द लूम एंड द लेंस: वीविंग स्टोरीज़, फ्रेमिंग लेगेसी’ का आयोजन भारत मंडपम के ओपन एयर एम्फीथिएटर में किया गया। इस प्रस्तुति में भारतीय हैंडलूम और सिनेमा की कालजयी कहानियों को एक दृश्यात्मक और सांस्कृतिक रूप से प्रभावशाली अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा,
“आईएफएफडी दिल्ली सिनेमा, भारत की सांस्कृतिक कल्पना और कहानी कहने की विरासत का उत्सव है। ‘द लूम एंड द लेंस’ जैसे प्रयास दिल्ली को एक ऐसे संगम के रूप में स्थापित करते हैं, जहां परंपरा और आधुनिक रचनात्मकता का मेल होता है। हैंडलूम जैसे पारंपरिक कला रूपों को सिनेमा जैसे आधुनिक माध्यम से नई अभिव्यक्ति मिलती है। इसी तरह हम भारत की सांस्कृतिक गहराई को दुनिया के सामने जीवंत, जड़ों से जुड़ा और भविष्य की ओर अग्रसर रूप में प्रस्तुत करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा,“हैंडलूम और सिनेमा भारत की दो सशक्त कहानी कहने की परंपराएं हैं—एक धागों में बुनी हुई और दूसरी रोशनी के फ्रेम्स में। दोनों मिलकर हमारी सामूहिक स्मृति और पहचान को संजोते हैं। साड़ी विशेष रूप से एक ऐसा प्रतीक रही है, जिसने पीढ़ियों तक भारतीयता की भावना को दैनिक जीवन और सिनेमा दोनों में सहेजा है।”
माननीय पर्यटन मंत्री श्री कपिल मिश्रा ने कहा,“इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल दिल्ली एक वैश्विक सांस्कृतिक मंच के रूप में उभर रहा है और ‘द लूम एंड द लेंस’ जैसे प्रयास इसके दायरे को सिनेमा से आगे बढ़ाते हैं। यह शोकेस ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को दर्शाता है, जहां देशभर की विविध हैंडलूम परंपराओं को फैशन और फिल्म के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।”
उन्होंने आगे कहा,
“दिल्ली पर्यटन ऐसे नवाचारपूर्ण सांस्कृतिक प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां हैंडलूम, सिनेमा और रचनात्मक उद्योग एक साथ आते हैं। इससे न केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान वैश्विक स्तर पर मजबूत होती है, बल्कि बुनकरों और कारीगरों को भी सार्थक पहचान और अवसर मिलते हैं।”
दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DT&TDC) के एमडी एवं सीईओ श्री सुनील अंचिपाका ने कहा,
“‘द लूम एंड द लेंस’ IFFD 2026 में एक अत्यंत आकर्षक और वैचारिक रूप से समृद्ध प्रस्तुति के रूप में उभरा है। जिस तरह इसमें सिनेमाई स्मृतियों, क्षेत्रीय हैंडलूम विविधता और कलात्मक अभिव्यक्ति को एक साथ पिरोया गया, वह सराहनीय है। IFFD जैसे मंच हमें दिल्ली को केवल मेजबान शहर ही नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक संयोजक के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर देते हैं।”
फैशन प्रस्तुति को तीन थीम आधारित क्रमों में विभाजित किया गया:
पहला क्रम – “हैंडलूम टू सिल्वर स्क्रीन”
इसमें 1940 के दशक से 2020 तक के प्रतिष्ठित सिनेमाई पलों से प्रेरित साड़ी परिधानों को प्रस्तुत किया गया, जो यह दर्शाता है कि भारतीय सिनेमा ने साड़ी को एक सांस्कृतिक और सौंदर्यात्मक प्रतीक के रूप में लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दूसरा क्रम – “फ्रॉम द वीवर्स ऑफ इंडिया”
इसमें भारत की समृद्ध हैंडलूम विविधता को प्रदर्शित किया गया—छत्तीसगढ़ की टसर और घीचा, वाराणसी की बनारसी बुटीदार, मुबारकपुर की लच्छा बुटा, मध्य प्रदेश की चंदेरी, आंध्र प्रदेश की वेंकटगिरी और केरल की कुथमपुल्ली—जो देश के बुनकर समुदायों की जीवंत परंपराओं और शिल्प कौशल को दर्शाती हैं।
ग्रैंड फिनाले – “एक भारत, श्रेष्ठ भारत – वंदे मातरम् को श्रद्धांजलि”
इसमें शिखा’स करिगारी के हस्तचित्रित हैंडलूम साड़ियों का विशेष संग्रह प्रस्तुत किया गया, जो पिचवाई, पट्टचित्र, वारली, गोंड, मधुबनी, असमिया और चित्तारा जैसी पारंपरिक भारतीय कला शैलियों से प्रेरित था। ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यह प्रस्तुति राष्ट्रीय एकता, गौरव और कलात्मक अभिव्यक्ति का प्रतीक बनकर उभरी।
विकास आयुक्त (हैंडलूम) डॉ. एम. बीना ने कहा,
“हैंडलूम को IFFD जैसे वैश्विक मंच से जोड़ना अत्यंत सराहनीय है। ऐसे प्रयास हैंडलूम को नवाचारी रूप में प्रस्तुत करते हैं और सिनेमा व कहानी कहने की कला से जोड़कर इसकी प्रासंगिकता को और मजबूत करते हैं।”
शिखा’स करिगारी की कलाकार, फैशन डिजाइनर एवं प्रमोटर शिखा अजमेरा ने कहा,“मेरे लिए साड़ी केवल एक परिधान नहीं, बल्कि एक जीवंत कैनवास है। इस शोकेस के माध्यम से हमने ‘लूम’ और ‘लेंस’ की कहानियों को एक साथ लाने का प्रयास किया है, जहां परंपरा और कथा एक अनुभव बन जाती है।”
शिखा’स करिगारी देशभर के प्रतिष्ठित कारीगरों के साथ मिलकर पारंपरिक कला को पहनने योग्य रूप में प्रस्तुत करने के साथ-साथ उनकी आजीविका और विरासत संरक्षण के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है।
फैशन निर्देशक श्री संदीप नवलक्खा के निर्देशन, उत्कृष्ट कोरियोग्राफी और स्टाइलिंग के साथ यह प्रस्तुति एक भावनात्मक और दृश्यात्मक अनुभव बनकर उभरी, जिसे दर्शकों और गणमान्य अतिथियों ने सराहा। यह शाम IFFD दिल्ली 2026 का एक यादगार क्षण साबित हुई, जहां फैशन ने सौंदर्य से आगे बढ़कर कहानी, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव का माध्यम बनकर अपनी छाप छोड़ी।
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