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शहीद दिवस पर “सपोर्ट आवर हीरोज” ने वीर नारी के परिवार को दी आर्थिक सहायता
पंजाब में स्व. सिपाही रामलाल के परिवार को ₹1.51 लाख की मदद, मकान पुनर्निर्माण के लिए अभी भी सहयोग की जरूरत

ब्यूरो चीफ राजेश कुमार, पुंछ
शहीद दिवस (23 मार्च 2026) के अवसर पर “सपोर्ट आवर हीरोज” (SOH) संस्था ने एक बार फिर अपने सामाजिक दायित्व का निर्वहन करते हुए रक्षा परिवारों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। संस्था ने पंजाब में एक बीमार और जरूरतमंद वीर नारी के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की।
कुछ दिन पहले ही वेटरन सहायता केंद्र (VSK) ऊंची बस्सी के माध्यम से SOH को 80 वर्ष से अधिक आयु की श्रीमती माया देवी की गंभीर स्थिति के बारे में जानकारी मिली थी। माया देवी स्वर्गीय सिपाही रामलाल की पत्नी हैं, जिनका घर जर्जर हालत में पहुंच चुका है और गिरने की कगार पर है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए SOH ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ₹1,51,000 की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। यह सहायता राशि स्टेशन मुख्यालय, ऊंची बस्सी (पंजाब) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान SOH के सह-संस्थापक गौरव शुक्ला और संस्था के संरक्षक लेफ्टिनेंट जनरल जे.एस. ढिल्लों (VSM) द्वारा परिवार को सौंपी गई।
श्रीमती माया देवी वर्तमान में अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही हैं। उनके पति ने देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया, लेकिन आज उनका परिवार बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है। वे एक मामूली विधवा पेंशन पर निर्भर हैं, जबकि उनके दो विवाहित बेटे दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार अपनी तीन बेटियों की पढ़ाई जारी रखे हुए है, जो क्रमशः कक्षा 11, 9 और 7 में अध्ययनरत हैं।
परिवार का घर, जो कभी सैनिक की जीवन भर की बचत से बना था, अब बेहद खराब स्थिति में है। पिछले वर्ष भारी बारिश के दौरान घर में पानी भर गया था, जिससे इसकी नींव कमजोर हो गई है। दीवारें क्षतिग्रस्त हैं और टीन की छत इसे रहने के लिए असुरक्षित बना रही है। आगामी मानसून को देखते हुए घर की मरम्मत अत्यंत आवश्यक है।
घर के पुनर्निर्माण की अनुमानित लागत ₹4.5 लाख है, जिसमें से परिवार ने किसी तरह ₹3 लाख की व्यवस्था कर ली है। शेष राशि की कमी को SOH ने ₹1,51,000 की सहायता देकर पूरा किया है।
SOH का कहना है कि यह पहल केवल एक सहायता नहीं, बल्कि उस सैनिक के परिवार के प्रति समाज की जिम्मेदारी है, जिसने देश के लिए निस्वार्थ सेवा की।
यह पहल एक संदेश देती है कि शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि केवल शब्दों से नहीं, बल्कि उनके परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए किए गए ठोस प्रयासों से दी जा सकती है।

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