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सरकारी स्कूल की बेटियों ने रचा इतिहास: सीमित संसाधनों में 90% से अधिक अंक हासिल

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
बाड़मेर (राजस्थान) — कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो मुश्किलें भी रास्ता नहीं रोक पातीं। इसका ताजा उदाहरण राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, बिशाला आगौर की छात्राओं ने पेश किया है। सीमित संसाधनों और कम स्टाफ के बावजूद विद्यालय की बेटियों ने कक्षा 10वीं के परीक्षा परिणाम में शानदार प्रदर्शन कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
विद्यालय की होनहार छात्रा रेशमा पन्नू ने 90.83 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। रेशमा की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उनके पिता का निधन उनकी शुरुआती पढ़ाई के दौरान ही हो गया था। कठिन परिस्थितियों के बावजूद रेशमा ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया।
रेशमा की सगी बहन गीता ने भी इसी विद्यालय से 83.17 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। वहीं कंचन सोनी ने भी 83.17 प्रतिशत अंक लाकर विद्यालय का गौरव बढ़ाया।
विद्यालय में कुल 237 छात्राओं का नामांकन है, जबकि कार्यवाहक प्रधानाचार्य सहित केवल 5 शिक्षकों का स्टाफ है। 12 कक्षाओं और सीमित संसाधनों के बीच भी शिक्षकों और छात्राओं के समर्पण का नतीजा है कि इस वर्ष कक्षा 10वीं की सभी 13 छात्राएं उत्तीर्ण हुईं, जिनमें से 11 छात्राओं ने प्रथम श्रेणी में सफलता हासिल की।
वरिष्ठ अध्यापक कमल किशोर ने छात्राओं की इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह परिणाम मेहनत, अनुशासन और शिक्षकों के मार्गदर्शन का प्रतिफल है।
यह सफलता न सिर्फ विद्यालय के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा है, जो यह संदेश देती है कि सरकारी स्कूलों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है—जरूरत है तो सिर्फ सही दिशा और मेहनत की।

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