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दिल्ली के सरकारी स्कूल में ‘शिक्षा के अधिकार’ का खुला उल्लंघन: स्कूल प्रधानाचार्य पर बच्चों का भविष्य बर्बाद करने का आरोप

दिल्ली से राहुल कुमार की रिपोर्ट
स्थान: दिल्ली
दिल्ली: दिलशाद गार्डन स्थित राजकीय वरिष्ठ बाल विद्यालय में बच्चों के दाखिले को लेकर मचे घमासान के बीच, प्रगति बच्चों की फाउंडेशन (NGO) तथा समाजसेवी श्री प्रवीण कुमार वर्मा ने शिक्षा विभाग और दिल्ली सरकार का ध्यान एक गंभीर मामले की ओर आकर्षित किया है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह उजागर किया गया है कि राजकीय वरिष्ठ बाल विद्यालय, सी-ब्लॉक, दिलशाद गार्डन (स्कूल आईडी-1106002) के प्रधानाचार्य द्वारा गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा के अधिकार (RTE) से वंचित किया जा रहा है।
मुख्य विवरण:
संवैधानिक अधिकारों का हनन: प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल के प्रधानाचार्य श्री प्रेम किशोर शर्मा द्वारा केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की शिक्षा नीतियों को दरकिनार कर, ‘नेवर एनरोल्ड’ (Never Enrolled) और ‘ड्रॉप आउट’ (Drop Out) बच्चों को दाखिला देने से साफ इनकार किया जा रहा है।
STC केंद्र को निष्क्रिय करने की साजिश: स्कूल में संचालित स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर (STC), जो मुख्यधारा से कटे बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए बनाया गया है, वहां वर्ष 2026 में एक भी नया दाखिला नहीं किया गया है। सरकारी रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि जहां वर्ष 2023 में 55 बच्चे नामांकित थे, वहीं वर्ष 2026 में यह संख्या गिरकर शून्य (0) पर पहुंच गई है।
अभिभावकों के साथ अभद्र व्यवहार: पीड़ित अभिभावकों द्वारा दी गई लिखित शिकायतों के अनुसार, जब वे अपने बच्चों के दाखिले की गुहार लेकर प्रधानाचार्य के पास पहुंचे, तो उन्हें कथित तौर पर यह कहकर अपमानित किया गया कि “बच्चों से काम कराओ, पढ़ाकर क्या फायदा”। यह रवैया सीधे तौर पर बाल श्रम को बढ़ावा देने वाला और अमानवीय है।
प्रशासनिक उदासीनता: इस गंभीर विषय पर उप शिक्षा निदेशक (DDE, NE-II) को कई बार लिखित शिकायत और स्मरण पत्र (Reminder) दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे बच्चों का कीमती शैक्षणिक वर्ष पूरी तरह बर्बाद हो रहा है।
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