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जनजातीय क्षेत्र में एनआरसीसी द्वारा कृषक-वैज्ञानिक संवाद एवं पशु स्वास्थ्य शिविर आयोजित

ऊँटनी के दूध व मूल्य संवर्धित उत्पादों में उद्यमिता की व्यापक संभावनाएँ : डॉ. पूनिया

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी

 

 भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा जनजातीय उपयोजना (टी.एस.पी.) के तहत आज दिनांक 17 मार्च 2026 को प्रतापगढ़ जिले की तहसील पीपलखूंट के गाँव नया बोरियां में ‘कृषक-वैज्ञानिक संवाद एवं पशु स्वास्थ्य जागरूकता शिविर’ आयोजित किया गया। एनआरसीसी बीकानेर द्वारा इंडियन फार्म फोरेस्‍ट्री डवलपमेंट को-आपरेटिव लि, प्रतापगढ़ के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में 265 से अधिक पशुपालक परिवार लाभान्वित किए गए। वैज्ञानिकों ने पशुपालकों के साथ गाय, भैंस, ऊँट, भेड़-बकरी, मुर्गी आदि पशुओं के स्‍वास्‍थ्‍य, आहार व पोषण, प्राप्‍त उत्‍पादन आदि पहलुओं पर बातचीत की। इस दौरान सहभागी पशुपालकों को कृषि एवं पशुपालन में विविध उपयोग हेतु विभिन्‍न संसाधन (तिरपाल, पशु दवाई किट, ग्रीन नेट, पीवीसी वॉटर पाईप, वॉटर कैम्‍पर, टॉर्च, मूंग बीज) वितरित किए गए ।

कृषक-वैज्ञानिक संवाद के दौरान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रतन कुमार चौधरी ने आनुवंशिक स्तर पर पशुओं में नस्ल सुधार के माध्यम से भावी पीढ़ियों में प्राप्त होने वाले लाभों पर प्रकाश डालते हुए इसके महत्व को रेखांकित किया। साथ ही उन्‍होंने कहा कि पशुपालन को आर्थिक रूप से सशक्त आजीविका के रूप में विकसित करने हेतु स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप आधुनिक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण आवश्यक है। उन्होंने क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों के समुचित उपयोग तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए उन्नत तकनीकों के प्रयोग पर बल दिया।

इस दौरान केन्‍द्र के वैज्ञानिक डॉ. श्याम सुंदर चौधरी ने कहा कि पशुपालन व्यवसाय में पशुओं के पोषण, प्रबंधन, आश्रय स्थल, स्वच्छता, उनके थनों की नियमित जांच, मिश्रित आहार तथा लवण आदि की मात्रा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए । साथ ही उन्‍होंने पशुओं को रोगों से बचाने के लिए आवश्यक सावधानियों के साथ समय पर उपचार एवं पशु चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता पर बल दिया ताकि जनजातीय पशुपालक पशुओं से भरपूर उत्पादन ले सकें ।

केन्द्र निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने वैज्ञानिकों के माध्यम से जनजातीय पशुपालकों को संबोधित करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर दूध, पशुधन एवं कृषि उपज के प्रभावी विपणन की व्यवस्था से पशुपालन व्यवसाय को सुदृढ़ आधार मिल सकता है। उन्होंने समन्वित कृषि (पशुपालन सहित) पद्धति को अपनाने से आय में वृद्धि की संभावनाओं पर बल दिया तथा भारत सरकार की जनजातीय उप-योजना का लाभ उठाने की अपील की। साथ ही उन्होंने ऊँटनी के दूध एवं उससे बने मूल्य संवर्धित उत्पादों की बढ़ती उपयोगिता का उल्लेख करते हुए इसमें उद्यमिता की संभावनाएं बताईं।

आई.एफ.एफ.डी.सी. की वरिष्ठ अधिकारी (परियोजना) श्रीमती संतोष चौधरी ने सामाजिक एवं आर्थिक बदलाव में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के कृषि एवं पशुधन क्षेत्र में महिलाओं की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने उपस्थित महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जब महिलाएं अपने अधिकारों, क्षमताओं एवं उपलब्ध अवसरों के प्रति जागरूक होंगी, तभी वे परिवार की आय बढ़ाने के साथ-साथ समाज के समग्र विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा सकेंगी। गांव नया बोरियां के प्रशासक प्रतिनिधि श्रीमती कजरी देवी ने ग्रामीण अंचल में संचालित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए केन्‍द्र के प्रति आभार व्यक्त किया ।

टी.एस.पी. के नोडल अधिकारी श्री मनजीत सिंह ने कहा कि भारत सरकार की इस उप-योजना के अंतर्गत जनजातीय क्षेत्रों में कृषि एवं पशुपालन आधारित आजीविका को सुदृढ़ बनाने हेतु उन्नत तकनीकों के प्रदर्शन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, किसान गोष्ठियों तथा आवश्यक कृषि संसाधनों की उपलब्धता जैसी गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। अत: इनके प्रति जागरूकता जरूरी है ताकि जनजातीय परिवारों की आय बढ़ने के साथ-2 उनके जीवन स्तर में और अधिक सुधार किया जा सके। केंद्र के सहायक प्रशासनिक अधिकारी श्री राजेश चौधरी ने आयोजित गतिविधियों के सफल निष्‍पादन में महत्‍ती सहयोग प्रदान किया।

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

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