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एनआरसीसी के वैज्ञानिकों ने ऊँटनी के दूध के गुणधर्मों की विद्यार्थियों को दी जानकारी

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी

 

बीकानेर, 18 फरवरी 2026 । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा अनसूचित जाति उप-योजना (एस.सी.एस.पी.) के तहत आज ‘ऊँटनी का दूध : बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए उत्‍तम आहार’ विषयक एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम राजकीय उच्‍च माध्‍यमिक विद्यालय, उदयरामसर में आयोजित किया गया जिसमें 63 विद्यार्थियों ने उत्‍साही सहभागिता निभाई एवं बच्‍चों को स्‍कूली किट का वितरण किया गया।

एनआरसीसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रतन कुमार चौधरी ने बच्चों को ऊँट की विलक्षण शारीरिक विशेषताओं एवं अनुकूलन क्षमता से अवगत कराते हुए बताया कि ऊँट आज भी एक बहुआयामी उपयोगी पशु है। उन्होंने ऊँटनी के दूध के औषधीय एवं पोषणात्मक गुणों को रेखांकित करते हुए बच्चों को विषम परिस्थितियों में भी ऊँट की तरह आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी।

केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. श्याम सुंदर चौधरी ने बताया कि ऊँटनी का दूध अपने औषधीय गुणों के कारण मधुमेह, क्षय रोग एवं ऑटिज़्म के प्रबंधन में सहायक है। यह सुपाच्य होता है तथा इसमें बीटा-लैक्टोग्लोबुलिन नहीं होता, जिससे यह उन बच्चों के लिए भी सुरक्षित है जिन्हें अन्‍य पशुओं के दूध से एलर्जी होती है।

केन्‍द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने वैज्ञानिकों के माध्‍यम से अपनी बात विद्यार्थियों तक पहुंचाते हुए कहा कि ऊँट एक चलती-फिरती ‘फार्मेसी’ है तथा ऊँटनी का दूध न केवल एक पोषण का मुख्‍य स्रोत है बल्कि यह थार के रेगिस्‍तान की एक अनमोल धरोहर है जो भविष्‍य की पीढ़ी को स्‍वस्‍थ एवं सशक्‍त बना सकती है। डॉ. पूनिया ने बताया कि आज का दौर गुणवत्ता का है, इस परिप्रेक्ष्य में ऊँटनी का दूध एकदम सटीक बैठता है क्योंकि यह औषधीय गुणधर्मों से भरपूर है।

केन्द्र के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. काशी नाथ ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में ऊँटों की अनूठी अनुकूलन क्षमता को देखते हुए इस प्रजाति का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। नोडल अधिकारी श्री मनजीत सिंह ने कहा कि भारत सरकार की एस.सी.एस.पी. उप-योजना खेती, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य आदि के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा सामाजार्थिक स्‍तर में सुधार के दृष्टिकोण से अपना महत्‍व सिद्ध कर रही है ।

प्रधानाचार्या श्रीमती संतोष जयपाल ने ऊँटनी के दूध व पर्यटन क्षेत्र में एनआरसीसी के प्रयासों की सराहना करते हुए कार्यक्रम को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया तथा आयोजन हेतु आभार व्यक्त किया। विद्यालय के उप प्रधानाचार्य श्री गौरीशंकर शर्मा एवं केन्‍द्र के श्री नेमीचंद बारासा, मुख्‍य तकनीकी अधिकारी ने भी अपने विचार रखे। केन्‍द्र के वित्त एवं लेखा अधिकारी श्री आशीष पित्ती एवं रा.उ.मा. विद्यालय के समस्‍त स्‍टाफ ने इस महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

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