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सोऽहम् साधना: प्राणतत्व के परिपोषण का सर्वोच्च साधन – डॉ नवीन योगी का मार्गदर्शन
योग और प्राणायाम में अजपा गायत्री जाप की तरह विख्यात सोऽहम् साधना से शरीर, मन और चेतना का संपूर्ण विकास संभव – डॉ नवीन योगी

बस्ती (राम मोहन पाल, वेदांत टाइम्स)। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र के वरिष्ठ विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ नवीन सिंह (राष्ट्रीय महासचिव, विश्व संवाद परिषद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रकोष्ठ, भारत) ने सोऽहम् साधना के महत्व और इसके अद्भुत लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ योगी के अनुसार, सोऽहम् साधना भावोत्कर्ष और शक्ति-अवतरण की प्रक्रिया है, जिसे अजपा गायत्री जाप के नाम से भी जाना जाता है। साधक श्वास लेते समय “सो” और छोड़ते समय “हम” ध्वनि का अनुभव करता है। यह साधना शरीर और मन में लोभ, मोह और वासना जैसी अवांछनीय प्रवृत्तियों को समाप्त कर उत्कृष्ट चिन्तन एवं ब्रह्म-सत्ता की अनुभूति कराती है।
> “प्रत्येक श्वास-प्रश्वास में परमात्मा सत्ता का शरीर और मन पर आधिपत्य बढ़ता जाता है। यह साधना केवल मानसिक कल्पना नहीं, बल्कि वास्तविक क्रिया और अनुभूति पर आधारित है।” – डॉ नवीन योगी
सोऽहम् साधना के माध्यम से नासिका द्वारा प्राणतत्व का संचरण सीधे आज्ञाचक्र तक पहुँचता है। भावपरक प्राण शरीर के समस्त अंगों में संतुलित शक्ति का संचार करता है, जबकि शक्तिपरक प्राणधारा मस्तिष्क में ब्रह्मनाड़ी के माध्यम से दिव्य ऊर्जा का प्रवाह सुनिश्चित करती है।
साधना का एक अन्य चमत्कारिक लाभ दिव्य गन्धानुभूति है। नियमित अभ्यास से साधक को साधना स्थल और उसके बाहर भी गंधों के माध्यम से दिव्य शक्तियों की अनुभूति होती है। यह अनुभव केवल मनोविनोद के लिए नहीं, बल्कि अतीन्द्रिय संकेतों और आध्यात्मिक शक्ति के विकास का माध्यम है।
इसके अलावा, सोऽहम् साधना स्वर साधना के क्षेत्र में भी मार्गदर्शक है। शरीर और मन की ऊर्जा इड़ा-पिंगला नाड़ियों और चन्द्र-सूर्य स्वर के अनुसार संचालित होती है। साधक इससे अपनी अन्तः-क्षमता, समय अनुसार कार्यों की उपयुक्तता और अविज्ञात जानकारियों को समझने की शक्ति विकसित कर सकता है।
डॉ नवीन योगी ने स्पष्ट किया कि सोऽहम् साधना पंचकोशों के अनावरण और प्रखर प्राणशक्ति के सहज विकास के लिए सर्वोत्तम साधन है। यही कारण है कि योग और प्राणायाम विशेषज्ञ इसे प्राणयोग का सर्वोच्च साधन मानते हैं।

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