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सुर्खियों में सवाल : राजस्थानी सिनेमा, साहित्य और भाषा के लिए बजट में क्या है?
भाजयुमो के प्रदेशाध्यक्ष शंकर गोरा नहीं दे पाए जवाब, देते भी क्या बजट में कुछ लिखा ही नहीं है

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
चूरू, 17 फरवरी। भाजयुमो के प्रदेशाध्यक्ष शंकर गोरा आज चूरू में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ के आवास पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकार के सवाल का जवाब नहीं सके। गोरा जवाब देते भी क्या, बजट में कुछ लिखा ही नहीं है। सवाल था कि राजस्थानी सिनेमा, साहित्य और भाषा के लिए बजट में क्या है?
फिर क्या था गोरा राजस्थानी प्रवासी सम्मेलन, पर्यटन आदि का जिक्र करते हुए सवाल के जवाब से भटक गए। जब उनसे कहा गया कि सवाल यह है कि राजस्थानी सिनेमा, साहित्य और भाषा के लिए बजट में क्या है? इस पर गोरा ने कहा कि उन्होंने पढ़ा नहीं है। लगते हाथ पत्रकार ने भी कह दिया कि कुछ है ही नहीं, पढ़ते भी क्या। इस पर गोरा ने यह कहकर पीछा छुड़वाया कि मांग रखेंगे। गोरा ने भाजपा सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले सरकार के प्रतिनिधि क्या जवाब दें, उन्हें नीचा देखना पड़ रहा
कुल मिलाकर जब राजस्थानी सिनेमा, साहित्य और भाषा के लिए सरकार ने बजट में कुछ दिया ही नहीं है तो प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले सरकार के प्रतिनिधि क्या जवाब दें। ऐसे में उन्हें नीचा देखना पड़ रहा है। यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा जिलाध्यक्ष बसंत शर्मा, भाजपा युवा नेता अभिषेक चोटिया, भाजयुमो के जिलाध्यक्ष गोपाल बालान, भाजपा नेता महेंद्र न्यौल, पार्टी नेता रामकेश मीणा, लोकेश चाहर, सत्येंद्र त्यागी आदि मौजूद थे। प्रवक्ता राकेश शर्मा ने बताया कि इससे पूर्व भाजयुमो जिलाध्यक्ष गोपाल बालाण अपनी टीम के साथ रतननगर चौराहे पर पहुंचे और भाजयुमो प्रदेषाध्यक्ष गोरा का जोरदार स्वागत किया व अगुवानी की।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी को चाहिए कि वे अपनी भूल को तुरंत सुधार लें
इस संबंध में फिल्म निर्माता, निर्देशक और लेखक राजेन्द्रसिंह शेखावत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने राजस्थानी सिनेमा, साहित्य और भाषा की अनदेखी करके बहुत बड़ी भूल की है। इनको चाहिए कि वे अपनी भूल को तुरंत सुधार लें और सबसे पहले कांग्रेस सरकार द्वारा वंचित रखी गई और इस सरकार के समय अनुदान के लिए आई राजस्थानी फीचर फिल्मों को तुरंत अनुदान राशि जारी करें।साहित्य अकादमियों में अध्यक्षों की नियुक्ति करें और राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलवाएं। डबल इंजन की सरकार है, कोई दिक्कत ही नहीं है फिर देर किस बात की है।
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