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पादहस्तासन से बढ़ती है लचीलापन और मानसिक शांति: योगाचार्य राममोहन पाल

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती (वेदांत टाइम्स/बस्ती टाइम्स 24)। सूर्य नमस्कार के अंतर्गत आने वाला तीसरा सोपान पादहस्तासन शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह जानकारी योगाचार्य राममोहन पाल ने एक विशेष योग अभ्यास सत्र के दौरान दी। उन्होंने बताया कि पादहस्तासन सूर्य नमस्कार की महत्वपूर्ण कड़ी है, जो शरीर को लचीला बनाने के साथ-साथ मन को भी शांत और स्थिर करती है।
योगाचार्य राममोहन पाल के अनुसार पादहस्तासन में साधक सीधे खड़े होकर श्वास छोड़ते हुए आगे की ओर झुकता है और अपने हाथों से पैरों या पंजों को स्पर्श करने का प्रयास करता है। इस प्रक्रिया में रीढ़ की हड्डी, हैमस्ट्रिंग तथा शरीर के पिछले हिस्से में अच्छा खिंचाव उत्पन्न होता है। नियमित अभ्यास से रीढ़ मजबूत होती है और शरीर की जकड़न दूर होती है।
उन्होंने बताया कि इस आसन का सीधा प्रभाव पाचन तंत्र पर पड़ता है। पेट के अंगों पर हल्का दबाव बनने से पाचन क्रिया सुदृढ़ होती है और पेट की अतिरिक्त चर्बी कम करने में सहायता मिलती है। कमर और पीठ दर्द से परेशान लोगों को भी इससे राहत मिल सकती है। इसके अतिरिक्त, पादहस्तासन रक्त संचार को बेहतर बनाता है, जिससे शरीर में ताजगी और ऊर्जा का संचार होता है।
योगाचार्य ने मानसिक लाभों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आसन तनाव, चिंता और मानसिक थकान को कम करने में सहायक है। नियमित अभ्यास से एकाग्रता और मानसिक संतुलन में भी सुधार देखा जाता है।
सावधानियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जिन लोगों को कमर, घुटनों या रीढ़ से संबंधित गंभीर समस्या हो, वे चिकित्सकीय परामर्श के बाद ही यह आसन करें। गर्भवती महिलाओं को इससे परहेज करना चाहिए। अभ्यास हमेशा खाली पेट, धीमी गति और बिना झटके के करना चाहिए।
अंत में योगाचार्य राममोहन पाल ने कहा कि सही विधि और नियमितता के साथ किया गया पादहस्तासन व्यक्ति को स्वस्थ, ऊर्जावान और मानसिक रूप से संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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