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मनोरोगी न बना दे इंटरनेट की लत

वेदान्त सिंह की रिपोर्ट

 

हर विकसित देश में टेक्नोलॉजी का ज्यों-ज्यों विकास होता है, उसी अनुपात में देश तरक्की की राह पर आगे बढ़ता जाता है। इसी कड़ी में लैंडलाइन फोन, मोबाइल (सेलफोन) और लेपटॉप व कंप्यूटर से आगे बढ़कर स्मार्ट फोन आया और सर्वसुलभ हो गया। विज्ञान की उल्लेखनीय प्रगति का ही यह प्रतिफल है कि बिजली-पानी के बिल जमा कराने हों या टेलीफोन बिल, रेल टिकट बुकिंग करानी हो या होटल बुकिंग, इंटरनेट की मदद से ये सारे काम आसानी से हो जाते हैं। शॉपिंग, पढ़ाई, बैंकिंग, जॉब्स-सब कुछ इंटरनेट पर उपलब्ध है।

कोई मैसेज भेजना, मेल भेजना या बात करना, गेम्स खेलना, फिल्म देखना, म्यूजिक सुनना, ऑनलाइन क्लासेस, पार्ट टाइम जॉब्स, सोशल साइट्स पर दोस्तों से चेटिंग-ये सारी सुविधाएं इंटरनेट पर उपलब्ध हैं।

महिलाएं व बच्चे भी आजकल ग्रोसरी से लेकर कपड़े, फर्नीचर, एसेसरीज, ज्वेलरी, खिलौने तक बाजार जाकर लंबी लाइनों में लगना छोड़कर ऑनलाइन ही मंगवाने लगे हैं। यहां तक कि बैंक के भी सारे काम ऑनलाइन होने लगे हैं। किसी के एकाउंट में पैसे ट्रांसफर करना अब कुछ सेकंडों का ही काम है।

निश्चित रूप से यह स्थिति सुविधाजनक है। इससे परिश्रम व समय दोनों की बचत होती है। इस बचे हुए समय में हम दूसरे बहुत से काम पूरे कर सकते हैं। लेकिन इंटरनेट के प्रयोग का एक नकारात्मक पक्ष भी है, जो आजकल गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। यही इंटरनेट का प्रयोग लत बन जाने पर शरीर, मन और सामाजिक जीवन पर गहरा कुठाराघात करना शुरू कर देता है, जिसके भयावह दुष्परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

*क्या है इंटरनेट की लत ?*

इंटरनेट में अत्यधिक व अनावश्यक दिलचस्पी को लत, नशा, व्यसन, एडिक्शन, आदी होना आदि नाम दिए जा सकते हैं। इंटरनेट की लत का अर्थ है इसको अत्यावश्यक आदत की तरह जीवन में शुमार कर लेना और दीवानगी की हद तक इसके वशीभूत हो जाना या इतना निर्भर होना कि इसके बिना पलभर भी न रह सकें। शुरू-शुरू में जरूरत के मुताबिक लोग 10 से 15 मिनट मोबाइल पर बिताते हैं। लेकिन धीरे-धीरे यह समय कब बढ़ जाता है, पता ही नहीं चलता और फिर इसके बिना पलभर भी गुजारना मुश्किल हो जाता है।

यह अवस्था न केवल शरीर, बल्कि मनोमस्तिष्क के लिए भी घातक है। इसे ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर या इंपल्सिव कंट्रोल डिसऑर्डर नाम दिया जाता है। इस रोग को इंटरनेट एडिक्शन डिसऑर्डर या प्रॉब्लेमेटिक इंटरनेट यूज (पीआईयू) नाम दिया गया है।

*इंटरनेट एडिक्शन के दुष्प्रभाव*

इंटरनेट एडिक्शन के प्रमुख दुष्प्रभाव निम्नलिखित है –

सामान्य व्यवहार, मेल-जोल खराब हो जाता है। पारिवारिक जीवन पर गंभीर, तनावपूर्ण प्रभाव पड़ता है। कई बार तो पति-पत्नी व बच्चे भी आपस में चेटिंग के द्वारा ही बातचीत करते हैं, भले ही आमने-सामने बैठे हों।

मित्रों से, प्रियजनों से दूरी हो जाती है।

कार्यक्षेत्र में कार्यक्षमता कम होकर कैरियर, नौकरी, व्यवसाय पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

महिलाएं अपने बच्चों की, घर-परिवार की देखभाल करने की बजाय उनको टालने लगती हैं।

बच्चे लगातार विडियो, गेम्स आदि देखते हैं और यदि उन्हें रोका जाता है, तो वे क्रोधित हो जाते हैं, चीखने-चिल्लाने लगते हैं।

किशोरवय बच्चों में मूड स्विंग, डर, मानसिक बेचैनी, समस्याओं से मुंह छिपाना, घबराहट आदि लक्षण मिलते हैं।

. परिवार की देखभाल करने की उनको टालने लगती हैं।

बच्चे लगातार विडियो, गेम्स देखते हैं और यदि उन्हें रोका है, तो वे क्रोधित हो जाते हैं, -चिल्लाने लगते हैं।

किशोरवय बच्चों में मूड स्विंग, मानसिक बेचैनी, समस्याओं से छिपाना, घबराहट आदि लक्षण हैं।

युवावर्ग कैरियर व शिक्षा के प्रति लापरवाह तथा घर-परिवार की जिम्मेदारी से दूर हो जाता है।

पोर्न विडियो व ब्लू फिल्में देखकर कृत्रिम रूप से बार-बार उत्तेजित होकर युवक पौरुष क्षमता खो देते हैं। इसी प्रकार कुछ युवतियों में नैतिक पतन की स्थिति भी देखने को मिल सकती है।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में चूहों पर रिसर्च में यह तथ्य सामने आया कि लंबे समय तक रेडियो फ्रीक्वेंसी रेडिएशन के प्रभाव में रहने के कारण द्विगुणित डी.एन.ए. स्पर्श कोशिकाओं में टूट जाते हैं, जिससे वीर्य की गुणवत्ता व प्रजनन क्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है।

मोबाइल फोन/स्मार्ट फोन से निकलने वाली रेडियो फ्रीक्वेंसी वेव्स माइक्रोवेव की अपेक्षा अधिक हानिकारक है।

विकिरण से तीन गुना अधिक कैंसर होने की आशंका बनी रहती है।

फोन खो न जाए-यह डर एक बीमारी का रूप ले लेता है। व्यक्ति हमेशा फोन की चिंता में व संभालने में लगा रहता है। इसे नोमोफोबिया कहा जाता है।

माइक्रोवेव रेडिएशन की वजह से सेल्स की एंटीऑक्सीडेंट डिफेंस क्षमता पर प्रभाव पड़कर इम्यूनिटी पॉवर कम होने लगती है तथा हार्ट डिजीज, आर्थराइटिस, अल्जाइमर व कैंसर जैसे रोग उत्पन्न हो जाते हैं।

मस्तिष्क की तंत्रिकाओं में शिथिलता आ जाती है।

किरणों से सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर भी मोबाइल से उत्सर्जित हानिकारक हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

डिसऑर्डर (एडीएचडी) हो जाता है। अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिविटी

लगातार एक ही स्थिति में बने रहने नेक पेन होने लगता है। से बैंक एक (पीठ दर्द), स्पांडिलाइटिस,

(कार्पल टनल सिंड्रोम) होता है। उंगलियों हाथ की मांसपेशियों में तनाव व अंगूठों की मांसपेशियों में खिंचाव होने लगता है।

कानों में लगातार इयरफोन लगाए रखने से श्रवण शक्ति कमजोर हो जाती है।

पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है।

मोबाइल को वाइब्रेशन मोड पर रखने से कैंसर का खतरा अधिक बढ़ जाता है।

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स आती हैं, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं के विकास को प्रभावित करती हैं। ऐसी दशा में पूर्ण (मैच्योर) सेल न बनकर अपरिपक्व कोशिकाएं बनकर ब्रेन ट्यूमर का निर्माण हो जाता है।

इम्यूनिटी पॉवर कम होने व मोबाइल पर मौजूद रोगाणुओं से सर्दी-जुकाम, खांसी व एलर्जी बार-बार होने लगती है।

डिप्रेशन, मूड डिसऑर्डर के साथ एंग्जाइटी व अनिद्रा रोग हो जाता है।

नेत्र ज्योति कम हो जाती है। बिना पलक झपकाए स्क्रीन पर लगातार देखने से आंखों में लालिमा, खुजली, रुक्षता (ड्राइनेस) व पानी आने जैसे लक्षण मिलते हैं।

ज्यों-ज्यों डिप्रेशन (अवसाद) बढ़ता है, त्यों-त्यों व्यक्ति उसे दूर करने के लिए और ज्यादा इंटरनेट पर व्यस्त हो जाता है। मस्तिष्क में खुशी के केंद्र को उत्तेजित करता है। इससे डोपामिन निकलता है तथा और अधिक खुशी पाने के लिए व्यक्ति और अधिक एडिक्ट होता चला जाता है। डोपामिन व सेरेटोनिन की कमी से आभासी खुशी में खुश रहने की नाकाम कोशिश करता है। यह बदलाव पूरी तरह मनोरोगी बना देता है। व्यक्ति एक दायरे में कैद हो जाता है।

आजकल बच्चे, किशोर व युवा ऑनलाइन गेम्स के लपेटे में आकर ‘ब्लूहेल’ जैसे खतरनाक गेम से कब जुड़ जाते हैं, पता ही नहीं चलता। जब यह गेम पूरी तरह अपनी गिरफ्त में लेकर जीवन का अंत कर देता है, तब माता-पिता व परिवार के लोगों को पता चलता है और फिर हाथ मलते रहने के सिवाय कुछ हासिल नहीं होता।

*डॉ अर्चना दुबे*, अध्यक्ष

अखंड एक्यूप्रेशर रिसर्च ट्रेंनिंग एंड ट्रीटमेंट इंस्टीट्यूट, प्रयागराज

 *अधिक जानकारी के लिए आप हमें इंस्टाग्राम एवं यूट्यूब पर भी फॉलो कर सकते हैं*

मेरे चैनल है-

*अर्चना दुबे एक्यूप्रेशर*

*अर्चना दुबे हेल्थ लैब*

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

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