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हरित महाशिवरात्रि का आह्वान: आस्था के साथ जड़ी-बूटियों के संरक्षण की अपील

 वेदान्त सिंह की रिपोर्ट

हरित महाशिवरात्रि का आह्वान: आस्था के साथ जड़ी-बूटियों के संरक्षण की अपील

– डॉ. शोभित कुमार श्रीवास्तव

गोरखपुर (वेदांत टाइम्स/बस्ती टाइम्स 24)। महाशिवरात्रि श्रद्धा, साधना और आत्मचिंतन का पर्व है। इस अवसर पर देशभर में श्रद्धालु भगवान शिव का अभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा और आक जैसे पवित्र पौधे अर्पित करते हैं। किंतु बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य में यह प्रश्न उठ रहा है कि कहीं हमारी आस्था अनजाने में प्रकृति को क्षति तो नहीं पहुँचा रही है।

डॉ. शोभित कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि भगवान शिव को प्रकृति का देवता, कैलाशवासी और वनप्रिय माना गया है। उनकी पूजा में प्रयुक्त वनस्पतियाँ भारतीय जैव विविधता और आयुर्वेदिक परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं। बेल का वृक्ष धार्मिक आस्था के साथ-साथ औषधीय गुणों से भी भरपूर है। इसका फल पाचन के लिए लाभकारी माना जाता है तथा यह शुष्क क्षेत्रों में भी पनपकर पर्यावरण संतुलन बनाए रखता है।

इसी प्रकार भांग, धतूरा और आक/मदार जैसे पौधे कठिन परिस्थितियों में उगते हैं और मिट्टी संरक्षण व पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन महाशिवरात्रि के दौरान इन पौधों की अंधाधुंध तोड़ाई, जड़ों सहित उखाड़ना और जंगलों से अवैज्ञानिक संग्रहण इनके अस्तित्व के लिए खतरा बनता जा रहा है।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शहरीकरण, प्रदूषण और वन कटाई के कारण जंगली जड़ी-बूटियों का प्राकृतिक आवास लगातार सिकुड़ रहा है। यदि असंतुलित दोहन जारी रहा, तो आने वाली पीढ़ियाँ इन पवित्र वनस्पतियों को केवल पुस्तकों में ही पढ़ सकेंगी।

डॉ. श्रीवास्तव ने आह्वान किया कि सच्ची शिव-भक्ति वही है जो प्रकृति की रक्षा करे। प्रत्येक श्रद्धालु यदि एक बेल का पौधा लगाए, मंदिर परिसरों में औषधीय उद्यान विकसित किए जाएँ और पूजा सामग्री स्थानीय नर्सरी से नियंत्रित रूप में ली जाए, तो संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि सामाजिक संस्थाएँ, विद्यालय और युवा समूह इस पर्व को “हरित महाशिवरात्रि” के रूप में मनाएँ। वृक्षारोपण, जनजागरूकता अभियान और औषधीय पौधों के संरक्षण की शपथ इस पर्व को नई पर्यावरणीय चेतना दे सकती है।

डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि शिव पंचतत्व—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—के प्रतीक हैं। जब हम वनस्पतियों और जलस्रोतों की रक्षा करते हैं, तब हम शिव के ही स्वरूप की रक्षा करते हैं।

समाचार के अंत में उन्होंने हर श्रद्धालु से संकल्प लेने की अपील की कि शिव को अर्पित करने से पहले, शिव की सृष्टि को सुरक्षित करें। श्रद्धा और विज्ञान का संतुलन ही सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण का सच्चा मार्ग है।

हरित संकल्प के साथ—हर हर महादेव!

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

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