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खेजड़ी नहीं तो राजस्थान नहीं — सुभाष बिश्नोई खारा की हुंकार, बीकानेर से उठा प्रदेशव्यापी आंदोलन

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर।
बीकानेर की धरती पर चल रहा खेजड़ी बचाओ महापड़ाव केवल एक धरना नहीं, बल्कि राजस्थान की पहचान और भविष्य को बचाने की निर्णायक लड़ाई बनकर उभरा। आंदोलन के दौरान भूख, प्यास और कठिन परिस्थितियों के बावजूद प्रदर्शनकारियों का संकल्प अडिग रहा। यह संघर्ष सिर्फ पेड़ों का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों का सवाल बन गया है।
महापड़ाव के दौरान भाजपा सरकार के मंत्री के.के. विश्नोई मौके पर पहुँचे और उन्होंने बीकानेर व जोधपुर संभाग में खेजड़ी कटाई पर रोक लगाने तथा कानून बनाने का आश्वासन दिया। मंत्री ने कहा कि इस संबंध में ठोस कदम उठाए जाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर इसे लिखित रूप में भी दिया जाएगा।
“आधा समाधान मंज़ूर नहीं” — सुभाष बिश्नोई खारा
इसी बीच आंदोलन स्थल पर एक सशक्त और बेबाक आवाज़ गूंज उठी। यह आवाज़ थी सुभाष बिश्नोई खारा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक पूरे राजस्थान में खेजड़ी कटाई पर पूर्ण और सख्त प्रतिबंध नहीं लगेगा, तब तक यह अनशन, धरना और आंदोलन नहीं रुकेगा।
सुभाष बिश्नोई खारा ने कहा,
“यह कोई ज़िद नहीं, बल्कि न्याय और पर्यावरण संरक्षण की मांग है। कानून आधा-अधूरा नहीं, पूरे प्रदेश में समान रूप से लागू होना चाहिए।”
संघर्ष से पैदा हुआ नेतृत्व
सुभाष बिश्नोई खारा ने यह साबित कर दिया कि यह आंदोलन किसी एक संभाग या क्षेत्र का नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान का है। उन्होंने यह संदेश दिया कि पर्यावरण पर राजनीति नहीं, बल्कि दूरदर्शी नीति बननी चाहिए।
जब मंच से आश्वासन दिए जा रहे थे, तब सुभाष सवाल पूछ रहे थे।
जब लोग थकने लगे, तब वही आंदोलन की ताकत बनकर खड़े रहे।
खेजड़ी: राजस्थान की आत्मा
खेजड़ी का वृक्ष केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक जीवनरेखा है। किसान, पशुपालक और ग्रामीण जीवन खेजड़ी से गहराई से जुड़ा हुआ है। सुभाष बिश्नोई खारा आज केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि उन सभी लोगों की आवाज़ बन चुके हैं जो खेजड़ी की छांव में पले-बढ़े हैं।
उन्होंने दो टूक कहा—
“अगर खेजड़ी बचेगी, तभी राजस्थान बचेगा।
अगर खेजड़ी कटेगी, तो मरुस्थलीकरण और तेज़ होगा।”
आंदोलन जारी रहने का ऐलान
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पूरे राजस्थान में खेजड़ी कटाई पर सख्त और प्रभावी कानून नहीं बनेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यह लड़ाई न थकेगी और न रुकेगी।
खेजड़ी बचेगी — राजस्थान बचेगा।
सुभाष बिश्नोई खारा ज़िंदाबाद।

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