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भारतीय सेना की 30 पंजाब बटालियन ने बालनोई सेक्टर में लगाया व्यापक मेडिकल, पशु चिकित्सा एवं कृत्रिम अंग शिविर

*ब्यूरो चीफ राजेश कुमार*
बालनोई | 06 फरवरी 2026
सामुदायिक कल्याण, मानवीय सहायता और राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराते हुए भारतीय सेना की 30 पंजाब बटालियन (10 ब्रिगेड के अंतर्गत) द्वारा अग्रिम बालनोई सेक्टर में एक मेडिकल, पशु चिकित्सा एवं कृत्रिम अंग सहायता शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्देश्य सीमावर्ती एवं दूरस्थ गांवों बालनोई, सगरा, डाबराज और मनकोट के ग्रामीणों को आवश्यक स्वास्थ्य एवं सहायक सेवाएं उपलब्ध कराना था।
शिविर में स्थानीय ग्रामीणों की भारी भागीदारी देखने को मिली। बड़ी संख्या में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, किसानों और दिव्यांगजनों ने शिविर की सेवाओं का लाभ उठाया। यह आयोजन नागरिक प्रशासन, चिकित्सा विशेषज्ञों एवं सामाजिक संगठनों के सहयोग से संपन्न हुआ, जो सशक्त सिविल–मिलिट्री सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण रहा।
शिविर का एक प्रमुख आकर्षण दिव्यांगजनों के लिए कृत्रिम अंग सहायता कार्यक्रम रहा। किवानिस क्लब ऑफ दिल्ली की विशेषज्ञ मेडिकल टीम ने सीमावर्ती गांवों से आए दिव्यांग व्यक्तियों की गहन जांच की तथा विभिन्न प्रकार की अक्षमताओं के लिए सटीक माप लिए। शिविर में मोबिलिटी एड्स और सहायक उपकरण वितरित किए गए तथा भविष्य में कस्टमाइज्ड कृत्रिम अंग फिटमेंट के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया गया, जिससे लाभार्थियों में नई उम्मीद और आत्मसम्मान का संचार हुआ।
इस अवसर पर भारतीय सेना, सीमा सुरक्षा बल (BSF) तथा नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के नागरिक चिकित्सकों की संयुक्त टीमों ने मरीजों की विस्तृत स्वास्थ्य जांच की। जरूरतमंदों को निःशुल्क दवाइयां वितरित की गईं और उन्हें स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण एवं जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूक किया गया। बुजुर्गों, महिलाओं और उच्च जोखिम वाले मरीजों पर विशेष ध्यान देते हुए, आवश्यक मामलों में उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफरल सलाह भी दी गई।
साथ ही, 27 मोबाइल फील्ड वेटरनरी हॉस्पिटल के विशेषज्ञों द्वारा एक समर्पित पशु चिकित्सा शिविर भी आयोजित किया गया। पशुपालकों को पशुओं का उपचार, टीकाकरण, कृमिनाशक दवाएं, प्रजनन प्रबंधन परामर्श तथा संतुलित आहार संबंधी जानकारी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त पशु चिकित्सा दवाइयां, खनिज मिश्रण एवं जानकारीपूर्ण पर्चे वितरित किए गए, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालन को वैज्ञानिक एवं टिकाऊ बनाने में मदद मिले।
बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की विशेष जरूरतों पर ध्यान तथा कृत्रिम अंग सहायता ने सीमावर्ती क्षेत्रों में समावेशी विकास के प्रति भारतीय सेना की संवेदनशील और मानवीय सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाया।
शिविर के सफल आयोजन पर स्थानीय ग्रामीणों ने भारतीय सेना के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना था कि इस प्रकार के प्रयास न केवल तात्कालिक स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान करते हैं, बल्कि सेना और नागरिकों के बीच विश्वास, सहयोग और सद्भाव को भी मजबूत करते हैं।
30 पंजाब बटालियन द्वारा आयोजित यह आउटरीच शिविर भारतीय सेना की उस भूमिका का सशक्त प्रमाण है, जिसमें वह सीमा सुरक्षा से आगे बढ़कर सेवा, संवेदना और मानवीय सहायता के माध्यम से आमजन के जीवन को छूते हुए जमीनी स्तर पर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

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