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प्रणाम आसन शरीर-मन के संतुलन की आधारशिला: योग प्रशिक्षक राम मोहन पाल

बस्ती से वेदान्त सिंह

 

बस्ती (वेदांत टाइम्स/बस्ती टाइम्स 24)।

भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर योग आज भी मानव जीवन को स्वस्थ और संतुलित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी कड़ी में प्रसिद्ध योग प्रशिक्षक राम मोहन पाल ने प्रणाम आसन के महत्व, विशेषताओं, लाभ और सावधानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि प्रणाम आसन सूर्य नमस्कार का पहला और अंतिम आसन है। देखने में यह अत्यंत सरल प्रतीत होता है, किंतु इसके प्रभाव बहुत गहरे हैं। इस आसन में साधक सीधे खड़े होकर दोनों हाथों को हृदय के सामने जोड़कर अभ्यास करता है, जिससे शरीर और मन में संतुलन स्थापित होता है।

राम मोहन पाल ने कहा कि प्रणाम आसन का नियमित अभ्यास मानसिक तनाव को कम करता है और साधक को ध्यान की अवस्था में प्रवेश करने में सहायक होता है। इससे आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और आंतरिक शांति में वृद्धि होती है। साथ ही यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है और शरीर की सही मुद्रा बनाए रखने में मदद करता है।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रणाम आसन हृदय और फेफड़ों के लिए लाभकारी है तथा शरीर में रक्त संचार को संतुलित करता है। योग प्रशिक्षक ने लोगों से इसे अपने दैनिक जीवन में शामिल करने की अपील की ताकि वे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें।

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

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