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समाज में पंचपरिवर्तन की आवष्यकता को ध्यान में रखकर मनाये जा रहे है ‘‘ विराट हिन्दू सम्मेलन’’

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर: दिनांक 25 जनवरी,2026
बीकानेर महानगर की विभिन्न बस्तियों में आयोजित होने वाले हिन्दू सम्मेलनों की श्रृंखला में आज भूतनाथ बस्ती के नीलकंठ एसी महादेव ,मुरलीधर व्यास नगर,बीकानेर में हिन्दू सम्मेलन का आयोजन हुआ।
हिन्दू सम्मेलन में केदारनाथ गुफा के महंत योगी ओमनाथ जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि हिन्दू समाज अपनी संस्कृति को लगातार विस्मृत कर रहा है। हिन्दू समाज में पहनावा, बोलचाल में पाषश्चात्य संस्कृति ने प्रवेश कर लिया है जो उचित नहीं है।उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि अपनी संस्कृति को याद रखना आवषश्यक हेै। उन्होंने विशेष रूप से आज की युवा पीढी का आह्वान किय कि वे ब्रह्ममुहूर्त में उठकर अपनी जीवनचर्या प्रारंभ करें इसके सुखद दूरगाामी परिणाम है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सूर्य सबको बिना भेदभाव के प्रकाश देता है उसी तरह हिन्दू समाज को बिना भेदभाव के साथ में रहना चाहिए इससे हिन्दू धर्म में ऊर्जा आएगी और समग्र हिन्दू समाज एक हो सकेगा।
प्रोफेसर सुनीता विश्नोई ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में मानव की गरिमा का वर्णन है। उन्होंने वर्तमान समय में कुटूम्ब प्रबोधन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पाषश्चात्य सभ्यता के चलते आज परिवारों में बिखराव हो रहा हेै जो सनातन संस्कृति और हिन्दू समाज के लिए उचित नहीं हेै। अपने उद्बोधन में उपस्थित मातृशक्ति से आह्वान किया कि कुटूम्ब प्रबोधन के माध्यम से संस्कृति को बचाये रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति बच्चों में अच्छे संस्कार देवें ताकि संस्कृति और नैतिक मूल्यों का संरक्षण हो सके।
श्री राजेश जी चूरा ने अपने उद्बोधन में ऐसे हिन्दू सम्मेलन में संत-महात्माओं द्वारा दिये गये उपदेशों को जीवन में अंगीकार करने का आह्वान किया।
ब्रह्मगायत्री शक्तिपीठ के अधिष्ठाता श्री रामेश्वरानंद जी महाराज‘‘दाताश्री’’ ने अपने उद्बोधन में सनातन का अर्थ -हम हैं,हम थे और हम रहेंगे-’’ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिन्दू धर्म ने ना जाने कितनी विकट परिस्थितियों को सहन किया है किन्तु आज भी सनातन धर्म है। उन्होंने अमेरिका की नीतियो को गलत बताते हुए कहा कि अब भारत आत्मनिर्भर है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति मानव मात्र के कल्याण की भावना रखती है। गीता में लिखी हुई हर बात जीवमात्र के कल्याण के लिये कही गयी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक हिन्दू को यह गर्व होना चाहिए कि वह हिन्दू है। मातृशक्ति से उन्होंने आह्वान किया कि आज हम दो हमारे दो की नीति को छोड़ना चाहिए क्योंकि यह हमारी संस्कृति को विनाश की ओर ले जायेगी। उन्होंने मातृशक्ति को बड़े परिवार की कल्पना का आह्वान किया ।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जोधपुर प्रांत के सामाजिक समरसता संयोजक श्री देवेन्द्र जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होेने के उपलक्ष्य में विभिन्न कार्यक्रमों की कड़ी में यह हिन्दू सम्मेलन आयोजित कर रहा है। हिन्दू संस्कृति चिरंतरकाल से चल रही संस्कृति है। यह संस्कृति ऋषि मुनियों और संतों की तपस्या से सदियों से चली आ रही है। इस पर कई विपदाएं आयी लेकिन संतो-महापुरूषों की तपस्या एवं बलिदान के कारण आज भी जीवित है। डाॅ.हेडगेवार के जीवन के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संघ को आज समाज ने अंगीकार किया है। समाज आज संघ की ओर सकारात्मक भाव से हिन्दू समाज के भविष्य को देख रहा है। अपने उद्बोधन में समाज में पंचपरिवर्तन का आह्वान करते हुए कहा कि आज सामाजिक समरसता, स्वदेशी,कुटूम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण एवं नागरिक कर्तव्यों की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है तभी हमारी संस्कृति बचेगी ।
कार्यक्रम में श्री एन.डी.भाटी संयोजक, हिन्दू सम्मेलन समिति,भूतनाथ बस्ती ने आभार व्यक्त किया एवं श्री रामकिशन सुथार द्वारा मंच संचालन किया गया ।
इस अवसर पर कार्यक्रम समाप्ति पश्चात् महाप्रसाद का भी कार्यक्रम रहा ।

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