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योग से अकेले में आनंदित रहने की कला – डॉ नवीन योगी

आंतरिक शांति से आत्मानंद की ओर

बस्ती से वेदान्त सिंह

 

आज की तेज़-रफ़्तार और प्रतिस्पर्धा से भरी जीवनशैली में अकेलापन कई लोगों के लिए मानसिक बोझ बनता जा रहा है। लेकिन योग हमें यह दृष्टि देता है कि अकेलापन समस्या नहीं, बल्कि स्वयं के साथ समय बिताने का एक अमूल्य अवसर है। योग के नियमित अभ्यास से व्यक्ति अकेले रहते हुए भी आनंद, शांति और संतुलन का अनुभव कर सकता है।

योग का सबसे महत्वपूर्ण अंग ध्यान है। प्रतिदिन कुछ समय शांत वातावरण में बैठकर श्वास-प्रश्वास पर ध्यान केंद्रित करने से मन के विचारों की चंचलता कम होती है। इससे व्यक्ति बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर हुए बिना भीतर से प्रसन्न और संतुलित रहने लगता है।

प्राणायाम जैसे अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और कपालभाति शरीर और मन के बीच सामंजस्य स्थापित करते हैं। इनका नियमित अभ्यास तनाव, चिंता और नकारात्मक भावनाओं को कम करता है, जिससे अकेलेपन में भी ऊर्जा और प्रसन्नता बनी रहती है।

योगासन—सुखासन, पद्मासन, ताड़ासन जैसे सरल आसन—शरीर को स्वस्थ और सशक्त बनाते हैं। स्वस्थ शरीर में सकारात्मक सोच विकसित होती है, जो आत्मविश्वास और आत्मसंतोष को बढ़ाती है।

स्वाध्याय यानी स्वयं को जानने की प्रक्रिया, योग दर्शन, गीता और प्रेरक साहित्य के अध्ययन से व्यक्ति आंतरिक रूप से सुदृढ़ बनता है। इससे जीवन का उद्देश्य स्पष्ट होता है और अकेले में भी व्यक्ति स्वयं को पूर्ण महसूस करता है।

इसके साथ ही प्रकृति से जुड़ाव—खुली हवा, हरियाली और मौन में किया गया योग अभ्यास—मन को सहज आनंद प्रदान करता है और साधना को और गहरा बनाता है।

अंततः योग यह सिखाता है कि सच्चा आनंद बाहर नहीं, भीतर है। जब व्यक्ति स्वयं के साथ सहज हो जाता है, तब अकेलापन भी उत्सव में बदल जाता है।

डॉ नवीन योगी

निदेशक, संकल्प योग वैलनेस सेंटर

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

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