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शासन नहीं, सेवा का संकल्प: रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ पर श्रद्धा और रामराज्य की अनुभूति

ब्यूरो चीफ मुकेश कुमार शर्मा
टपूकड़ा/अयोध्या। अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ देशभर में श्रद्धा, सेवा और संकल्प के भाव के साथ मनाई गई। इसी क्रम में टपूकड़ा क्षेत्र के नौला धाम मंदिर में भक्ति भाव से विशेष धार्मिक आयोजन हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने का संदेश दिया। समाजसेवी एवं भारतीय जनता पार्टी नेता टीटू गर्ग ने श्रीराम प्रभु एवं माता सीता की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर विधिवत पूजन किया और प्रसाद वितरण किया। इस अवसर पर मंदिर कमेटी अध्यक्ष घनश्याम मित्तल, चंद्रभान यादव, पंकज यादव, कृष्णा, सोनू सहित मंदिर के पुजारी व श्रद्धालु उपस्थित रहे। भजन-कीर्तन और जयघोष के बीच पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
वक्ताओं ने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उस विचार की पुनर्स्थापना है, जहां शासन नहीं, सेवा सर्वोपरि होती है। 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में भगवान श्रीराम की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ जिस भावना का उदय हुआ, उसके दो वर्ष पूरे होने पर यह स्पष्ट हुआ है कि यह कालखंड केवल आस्था का नहीं, बल्कि करुणा, कर्तव्य और जनकल्याण का प्रतीक बन चुका है। बीते दो वर्षों में सेवा भाव को जमीन पर उतरते देश ने देखा है—कहीं राशन के रूप में, कहीं इलाज के रूप में, तो कहीं पक्के मकानों और स्वच्छ पेयजल की सुविधाओं के रूप में। वक्ताओं ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के निर्णयों ने न केवल सुविधाओं का विस्तार किया, बल्कि आमजन में आत्मविश्वास और राष्ट्र गौरव की भावना को भी सुदृढ़ किया है। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धालुओं ने रामराज्य की सच्ची परिकल्पना को अपनाने का संकल्प लिया—जहां शासन का मूल उद्देश्य सेवा हो और हर नागरिक का सर्वांगीण उत्थान सुनिश्चित किया जाए।

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