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सीए ओमप्रकाश बांठिया ने वित्त मंत्री को ट्रस्टों के आयकर सुधार हेतु सुझाव भेजे

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
राजस्थान टैक्स कंसलटेंट संगठन के पूर्व उपाध्यक्ष सीए ओमप्रकाश बांठिया ने भारत सरकार के माननीय वित्त मंत्री को चैरिटेबल ट्रस्ट और सार्वजनिक संस्थाओं के आयकर से जुड़े सुधार के लिए सुझाव भेजे हैं।
बांठिया ने अपने सुझाव में कहा कि भारत हमेशा से धर्म और सेवा के कार्यों में अग्रणी रहा है। देश के ऋषि-मुनियों और महापुरुषों की प्रेरणा के कारण सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं जैसे ट्रस्ट, मंदिर, गौशाला, धर्मशाला, पशु शिविर, चिकित्सा शिविर और शिक्षा सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में आयकर अधिनियम की धारा 12A और 80G के तहत ट्रस्टों के पंजीकरण और नवीनीकरण में कई कठिनाइयाँ उत्पन्न हो रही हैं। छोटे ट्रस्टों के लिए ट्रस्टी और उनके परिवार की व्यक्तिगत जानकारी, दानदाताओं का पैन व आधार विवरण जैसी जटिल प्रक्रियाएं सेवा कार्य करना मुश्किल बना रही हैं।
बांठिया ने सुझाव दिया कि यदि सरकार सेवा कार्यों पर टैक्स लगाना चाहती है, तो इसके लिए एक आसान और पारदर्शी स्लैब लागू किया जा सकता है:
10 लाख तक की आय: कर मुक्त
10 लाख से 50 लाख: 5% आयकर
50 लाख से 2 करोड़: 10% आयकर
2 करोड़ से ऊपर: 15% आयकर
उन्होंने यह भी कहा कि कॉर्पस फंड और सेट-अपार्ट जैसी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए छोटे ट्रस्टों को मामूली करारोपण के साथ राहत दी जाए। साथ ही, CSR और FCRA फंड के निवेश पर अलग नियम बनाकर बड़े ट्रस्टों के लिए विशेष निगरानी की जा सकती है।
बांठिया ने उम्मीद जताई कि इस तरह के सुधारों से ट्रस्ट आसानी से सेवा कार्य कर सकेंगे और आयकर विभाग को भी अनावश्यक परेशानी नहीं होगी।

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