देशबालोतराब्रेकिंग न्यूज़राजस्थान
स्वामी विवेकानंद:- युवाओं के आदर्श और भारत के गौरव

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
बालोतरा:- 12 जनवरी को भारत में *राष्ट्रीय युवा दिवस* के रूप में मनाया जाता है यह दिन स्वामी विवेकानंद जी की जयंती है जिन्होंने अपने छोटे से जीवन काल में ही भारतीय युवाओं के मन में आत्मविश्वास साहस और देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित की! आज हम 163 भी जयंती मना रहे हैं विशेष कर *एक विकसित भारत* के रूप में….!
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को मकर संक्रांति के दिन सोमवार को सुबह 6:49 पर बंगाल कोलकाता के एक कुलीन बंगाली कायस्थ परिवार में हुआ था उनका बचपन का नाम *नरेंद्र नाथ दत्त* और पिता श्री विश्वनाथ दत्त एक प्रसिद्ध हाई कोर्ट के वकील थे और माता भुवनेश्वरी देवी अत्यंत धार्मिक और संस्कारी महिला थी! बचपन से ही नरेंद्र में तीव्र बुद्धि जिज्ञासु स्वभाव और आध्यात्मिक खोज की लालसा दिखाई देती थी वह खेलकूद संगीत अध्ययन और तर्क वितर्क में सम्मान रूप से निपुण थे!
उनके जीवन में सबसे बड़ा परिवर्तन तब आया जब वे *श्री रामकृष्ण परमहंस* से मिले शुरू में नरेंद्र ने अपने तर्कों से गुरु को परखने का प्रयास किया लेकिन रामकृष्ण की दिव्य शक्ति ने उनके हृदय को छू लिया गुरु ने उन्हें बताया कि ईश्वर को देखा जा सकता है और सभी जीवो में वही परमात्मा निवास करता है गुरु के मार्गदर्शन में नरेंद्र से विवेकानंद बने और संन्यासी जीवन अपनाया!
*1893 में अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद* में स्वामी विवेकानंद ने भारत का प्रतिनिधित्व किया जब वह मंच पर आए और *द ब्रदर एंड द सिस्टर ऑफ अमेरिकन* कहते ही पूरे सभागार में तालिया की गड़गड़ाहट गंजी और 2 मिनट तक बजती रही उनके इस ऐतिहासिक भाषण ने पूरे विश्व को भारतीय संस्कृति और सहिष्णुता सार्वभौमिकता स्वीकार्य और वेदांत के दर्शन से परिचित कराया था! उन्होंने कहा….
“*सभी धर्म सत्य की ओर ले जाते हैं जैसे विभिन्न नदियां समुद्र में मिलती है वैसे ही विभिन्न धर्म एक ही परम सत्य की ओर जाते हैं*”
स्वामी जी ने *रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन* की स्थापना की जिनका उद्देश्य था आत्म कल्याण और जगत कल्याण से उन्होंने कहा की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है गरीब पीड़ित शोषित बीमार अशिक्षित और दरिद्र लोगों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची आराधना है!
*युवाओं के प्रति उनके विचार आज भी उतने ही प्रेरणादायक हैं*
* *उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए*
* *मुझे 100 ऊर्जावान युवा दो में भारत बदल दूंगा*
* *शक्ति ही जीवन है निर्बलता ही मृत्यु*
* *हम वही बनते हैं जो हम सोचते हैं*
वे मानते थे कि *युवा ही राष्ट्र का भविष्य है* शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो चरित्र बनाएं साहस दे और आत्मविश्वास जगाएं
आज के संदर्भ में जब *भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र* बनने का संकल्प ले चुका है तब स्वामी विवेकानंद के विचार मार्गदर्शन बनते हैं वे चाहते थे कि युवा न केवल स्वयं को सशक्त बनाएं बल्कि समाज की देश की सेवा में लगे अर्थात समाज के हर वर्ग से नई ऊर्जा आएगी
स्वामी विवेकानंद का जीवन संक्षिप्त था उन्होंने 4 जुलाई 1902 को अंतिम सांस ली केवल *39 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली* कोलकाता के *बेलूर मठ पर स्वामी जी का समाधि स्थल* बना हुआ है लेकिन इस छोटे से समय में उन्होंने जो कार्य किया वह कई शताब्दी तक प्रेरणा देते रहेंगे उन्होंने भारत को न केवल आध्यात्मिक बल दिया बल्कि पूरे विश्व पटल पर गरिमा के साथ खड़ा किया लिए स्वामी विवेकानंद जी की जन्म जयंती पर हम उनके विचारों को जीवन में उतारने का संकल्प ले अपने भीतर की शक्ति को जागृत करें दूसरों की मदद करें और देश के निर्माण में योगदान दे क्योंकि जैसा उन्होंने कहा था *अंधकार से डरो मत क्योंकि तुम स्वयं प्रकाशमान हो*!
जय भारत ! जय विवेकानंद !
*नेमीचंद बारूपाल*
*कार्यकर्ता*
*विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी , राजस्थान प्रांत* ! M. 7568142152

Subscribe to my channel


