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जसोल में योगक्षेम अणुव्रत संगठन यात्रा: 21वीं सदी में अणुव्रत की चाल को आगे बढ़ाने का आह्वान

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
जसोल, 11 जनवरी 2026:
जसोल के तेरापंथ भवन, नाकोड़ा रोड में योगक्षेम अणुव्रत संगठन यात्रा का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर 21वीं सदी में अणुव्रत की चाल को कैसे बढ़ाया जाए, इस विषय पर विचार विमर्श और प्रेरक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम की शुरुआत अणुव्रत गीतिका के संगान से हुई, जिसमें अणुव्रत समिति जसोल और तेरापंथ महिला मंडल की वरिष्ठ महिलाओं ने अपनी मधुर आवाज़ में भाग लिया।
इस अवसर पर अणुव्रत विश्व भारती के सहमंत्री श्री उमेंद्र जी गोयल, अणुव्रत लेखक मंच के संयोजक श्री जिनेन्द्र जी कोठारी, राज्य प्रभारी जयपुर संभाग श्रीमती रीना जी गोयल और राज्य प्रभारी जोधपुर संभाग डॉ. सुधा जी भंसाली ने 2026 का नया अणुव्रत कैलेंडर लोकार्पित किया और बैनर “21वीं सदी में कैसे बढ़े अणुव्रत की चाल?” का विमोचन किया। साथ ही सिवाँची मालाणी को नए अणुव्रत लेखक मंच की घोषणा की गई।
कार्यक्रम में अणुव्रत आचार संहिता का वाचन अणुव्रत विश्वभारती के सहमंत्री श्री उमेंद्र जी गोयल द्वारा किया गया, जिसे सभी उपस्थित सदस्यों ने खड़े होकर अनुमोदित किया। अणुव्रत समिति जसोल के अध्यक्ष श्री महावीर चंद सालेचा ने स्वागत भाषण में बताया कि समिति समाज के विभिन्न कार्यक्रमों में नशा मुक्त जीवन के लिए लोगों को प्रेरित कर रही है।
पूर्व अध्यक्षों ने वर्ष भर के कार्यों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें विद्यालयों में पौधा रोपण, जीवन विज्ञान शिविर, मुस्लिम भाइयों को रोज़ा इफ्तियार, और 15 विभिन्न बैंचों में वस्तुओं का वितरण शामिल था।
केंद्रीय पदाधिकारी श्री उमेंद्र जी गोयल ने जसोल अणुव्रत समिति के कार्यों की सराहना की और जीवन विज्ञान शिविरों में भाग लेने और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा दी। अणुव्रत मंच असाडा और अणुव्रत लेखक मंच की भी प्रशंसा की गई।
कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक अवसरों पर अणुव्रत अपनाने की पहल को भी साझा किया गया। इसके साथ ही उपस्थित अतिथियों को अणुव्रत दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन अणुव्रत मंत्री सफरूखान ने किया। अंत में कवि श्री अशोक जी प्रदीप ने गुरुदेव तुलसी पर कविता प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया।
इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि 21वीं सदी में अणुव्रत का प्रचार और पालन, सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन दोनों में शांति, संयम और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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