उत्तर प्रदेशबस्तीब्रेकिंग न्यूज़शिक्षास्वास्थ्य
प्राकृतिक चिकित्सा में धूप स्नान का महत्व
भाप स्नान का सरल और प्रभावी विकल्प

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती। संकल्प योग वैलनेस सेंटर बस्ती के योगाचार्य डॉ नवीन सिंह ने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में धूप स्नान को एक अत्यंत उपयोगी और प्रभावशाली उपचार विधि माना गया है। यह भाप स्नान की एक उत्कृष्ट वैकल्पिक क्रिया है। जब भाप स्नान के लिए आवश्यक बॉक्स, कवर या भाप उत्पन्न करने के साधनों की व्यवस्था संभव न हो, तब धूप स्नान द्वारा भाप स्नान के लगभग सभी लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।
धूप स्नान के लिए घर की छत या बालकनी में ऐसी जगह का चयन करना चाहिए, जहाँ दोपहर के समय सीधी धूप आती हो। इसका सर्वोत्तम समय दोपहर 12 बजे से 2 बजे के बीच माना गया है। इस क्रिया के दौरान केवल अधोवस्त्र पहनना चाहिए। धूप स्नान से पूर्व एक गिलास ठंडा पानी पीना तथा सिर पर ठंडे पानी में भिगोया हुआ कपड़ा तीन-चार तह में रखना आवश्यक बताया गया है। इसके बाद धूप में चटाई बिछाकर कम्बल ओढ़कर बैठना चाहिए, ताकि पूरा शरीर ढका रहे और केवल सांस लेने के लिए नाक खुली हो।
कुछ ही समय में शरीर गर्म होने लगता है और पसीना आने लगता है। लगभग आधे घंटे में जब पसीना पर्याप्त मात्रा में आ जाए, तो धूप स्नान समाप्त कर देना चाहिए। यदि किसी को चक्कर आने लगें तो तुरंत उठ जाना चाहिए। इसके पश्चात ठंडे पानी से बिना साबुन व तेल के स्नान करना चाहिए, जिससे शरीर को शुद्ध और ताजगी मिलती है।
धूप सेवन भी प्राकृतिक चिकित्सा की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इससे शरीर में विटामिन डी की प्राकृतिक उत्पत्ति होती है। गर्मियों में सुबह 8 से 10 बजे तक तथा सर्दियों में दोपहर 10 से 2 बजे तक की धूप इसके लिए उपयुक्त मानी जाती है। विटामिन डी की अधिक कमी होने पर सरसों के तेल से मालिश कर धूप सेवन करने की सलाह दी जाती है। यह प्रक्रिया सप्ताह में एक बार करने से हड्डियाँ मजबूत होती हैं, त्वचा रोगों में लाभ मिलता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि धूप सेवन की सुविधा उपलब्ध हो, तो इसका नियमित लाभ अवश्य उठाना चाहिए।
— प्रोफ़ेसर डॉ. नवीन सिंह
(निदेशक)
संकल्प योग वैलनेस सेंटर, बस्ती

Subscribe to my channel


