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मधुमेह में अचूक है घरेलू उपचार

बस्ती से वेदान्त सिंह
पाचन संस्थान, विशेषकर पेनक्रियाज ग्रंथि के अच्छी तरह से काम न करने से प्रायः मधुमेह का प्रकोप होता है। श्वेतसार (चावल, दाल, रोटी आदि) अधिक खाने, सब्जियां, फल, सलाद आदि न खाने और शारीरिक श्रम व व्यायाम न करने वाले व्यक्ति इस रोग से अधिक पीड़ित होते हैं। व्यक्ति जो कुछ भी श्वेतसार खाता है, उसके हजम होने से ग्लूकोज बनता है। यह ग्लूकोज शरीर की मांसपेशियों व तंतुओं में दग्ध होकर शरीर में ताप व शक्ति उत्पन्न करता है। जब किसी शारीरिक विश्रृंखलता के कारण पेशियों व तंतुओं की ग्लूकोज का अवशोषण करने की क्षमता नष्ट हो जाती है, तो ग्लूकोज रक्त में जमा होने लगता है और फिर मूत्र द्वारा बाहर निकलने लगता है। सामान्यतया इसी विकृति को मधुमेह नाम दिया जाता है।
मधुमेह को नियंत्रित करने में घरेलू उपचार विशेष रूप से प्रभावी सिद्ध होता है। मुख्यतः निम्नलिखित घरेलू प्रयोगों को अपनाने से इस रोग में आशातीत लाभ मिलता है-
6-6 ग्राम मेथीदाना लेकर थोड़ा कूटकर प्रतिदिन शाम में 250 मि.ली. पानी में भिगो दें और सुबह में इसे अच्छी तरह घोटकर किसी स्वच्छ सूती कपडे से छानकर बिना मीठा मिलाए पिएं। 2 माह तक नियमित रूप से यह प्रयोग करने से मधुमेह से छुटकारा मिल जाता है।
2 चम्मच मेथीदाना और 1 चम्मच सौंफ मिलाकर कांच के गिलास में 200 मि.ली. पानी में प्रतिदिन रात में भिगो दें और सुबह में किसी स्वच्छ सूती कपड़े से छानकर पिएं। यह प्रयोग भी रक्त शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करता है।
जामुन के पत्तों का रस मधुमेही के लिए अत्यंत लाभदायी है। जामुन के 4 हरे व नरम पत्ते बारीक पीसकर 60 मि.ली. पानी में मिलाकर छान लें और सुबह में खाली पेट 10 दिनों तक लगातार पिएं। इसके बाद 2 माह के अंतराल पर 10 दिनों तक यह प्रयोग करें। इस प्रयोग से मूत्र में शर्करा आने की समस्या नियंत्रित हो जाती है।
मधुमेह की शुरुआत में यानी प्रारंभिक अवस्था में जामुन के 4-4 पत्ते सुबह-शाम चबाकर सेवन करने से तीसरे ही दिन लाभ महसूस होने लगता है।
जामुन के फल मधुमेह का नाश करते हैं। अच्छी तरह पके जामुन के फल 60 ग्राम की मात्रा में लेकर 300 मि.ली. उबलते पानी में डालकर ढक दें और 30 मिनट के बाद मसलकर छान लें। इस योग के 3 भाग करके 1-1 भाग दिन में तीन बार सेवन करने से रोगी के मूत्र में शर्करा की मात्रा बहुत कम हो जाती है। प्रतिदिन जामुन के फलों के मौसम में जामुन का सेवन करने से रोगी बिलकुल ठीक हो जाता है।
जामुन के फलों की गुठलियों की गिरियां भी मधुमेह में लाभ पहुंचाती हैं। जामुन की गुठलियों की गिरियों को छाया में सुखाकर चूर्ण बनाकर रख लें। प्रतिदिन सुबह-शाम 3-3 ग्राम की मात्रा में ताजे पानी के साथ यह चूर्ण लेते रहने से मधुमेह दूर होता है और मूत्र में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है।
करेला मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों के लिए प्रकृति का अद्भुत वरदान है। करेले का सेवन करने से रक्त में ग्लूकोज काफी कम हो जाता है। करेले की सब्जी खाने वाले रोगियों में भी ग्लूकोज सहनशीलता काफी बेहतर पायी जाती है। मधुमेह से पीड़ित दशा में करेले का रस प्रतिदिन सुबह-शाम 6-6 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पूरा लाभ मिलता है। करेले को उबालकर नमक व हरी मिर्च मिलाकर खाना भी लाभप्रद होगा।
जौ का आटा 5 भाग और चने का आटा 1 भाग मिलाकर रोटी बनाकर चौगुनी मात्रा में सब्जियों के साथ खाएं। केवल चने की रोटी भी 8-10 दिनों तक नियमित रूप से खाने से मूत्र में शर्करा आने की समस्या नियंत्रित हो जाती है।
भोजन में प्रचुर मात्रा में हरी सब्जियों को शामिल करने से मधुमेह में पूरा लाभमिलता है।
भोजन में रेशेदार पदार्थ-सब्जी, सलाद, करेले का रस, बथुआ, चौलाई का रस, नीबू, आंवला, चोकर, छिलके वाली दालें, संतरा, मौसमी, अनन्नास, जामुन, अमरूद आदि लेने से मधुमेह को । नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
न गेहूं का आटा 2 भाग तथा 1-1 भाग जौ, चना व सोयाबीन मिलाकर न पिसवाएं। मेथी, बथुआ, चौलाई को को मिक्सर में पीसकर इस आटे में मिलाकर का गूंध लें। इसे 6-8 घंटे पहले तैयार की करके रखें। इस मिश्रण की 1-2 चपाती ■ा प्रतिदिन सुबह-शाम खाएं। इसके साथ को अधिक मात्रा में सलाद, सब्जी और थोड़ा दही लें। यह मधुमेह में विशेष रूप से उपयुक्त भोजन है।
सुबह में खाली पेट करेला का रस, घीया का रस, बथुआ का रस, गाजर-अदरक का रस, खीरे का रस आदि लें। शाम में किसी फल-मौसमी संतरा, अनन्नास या सब्जी का रस लेना लाभप्रद होगा।
बारिश के मौसम में खाली पेट 5-7 नीम की कोमल पत्तियां और बेल या सदाबहार के 3-4 पत्ते धोकर चबा लें, फिर थोड़ा पानी पी लें। इस प्रयोग से भी मधुमेह में लाभ मिलता है।
मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति भोजन करने से 30 मिनट पहले दोनों समय नीबू-पानी ले सकते हैं। नाश्ते में गरमी के मौसम में दही, नमक, जीरा, काली मिर्च के साथ साग वाली चपाती तथा सर्दी के मौसम में क्रीम निकला दूध-दलिया लें। अंकुरित मूंग या चना हल्के भाप में पकाकर उसमें टमाटर, प्याज, खीरा, अदरक डालकर लें। दोपहर में 1-2 चपाती सलाद व सब्जी के साथ खाएं। शाम में फल या फल का रस लें। रात में सब्जी का सूप
लें। मैदा की रोटी, चावल, छिलकारहित या 1-2 चपाती, सलाद, सब्जी आदि दाल, तले-भुने, मीठे व अत्यधिक मिर्च-मसालेदार पदार्थ आदि से परहेज बरतें।
*डॉ अर्चना दुबे*, अध्यक्ष
अखंड एक्यूप्रेशर रिसर्च ट्रेंनिंग एंड ट्रीटमेंट इंस्टीट्यूट, प्रयागराज
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*अर्चना दुबे हेल्थ लैब*

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