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यम का तीसरा अंग ‘अस्तेय’: नैतिकता, संयम और आंतरिक शांति का मूल आधार- डॉ नवीन सिंह

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती।
पतंजलि योगदर्शन में वर्णित अष्टांग योग के प्रथम सोपान यम के तीसरे अंग अस्तेय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए योगाचार्य डॉ. नवीन सिंह ने कहा कि अस्तेय केवल चोरी न करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन, वचन और कर्म—तीनों स्तरों पर पूर्ण ईमानदारी और संयम का भाव विकसित करने की साधना है। हिन्दू तथा जैन दर्शन में अस्तेय को एक महान नैतिक गुण माना गया है, जो व्यक्ति और समाज दोनों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
डॉ. सिंह ने बताया कि अस्तेय का शाब्दिक अर्थ भले ही चोरी न करना हो, किंतु इसका व्यापक अर्थ है—किसी भी व्यक्ति की संपत्ति, अधिकार या विचार को उसकी अनुमति अथवा इच्छा के बिना न लेना और न ही लेने की इच्छा करना। दूसरे के धन, पद या साधनों के प्रति लालसा रखना भी अस्तेय के सिद्धांत के विरुद्ध है। यही कारण है कि योगशास्त्र में इसे केवल बाह्य आचरण नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता से जोड़ा गया है।
उन्होंने कहा कि चोरी और लोभ व्यक्ति को अंदर से खोखला कर देते हैं। ऐसा व्यक्ति न केवल आत्मिक रूप से कमजोर होता है, बल्कि समाज की दृष्टि में भी उसका सम्मान कम हो जाता है। इसके विपरीत, अस्तेय का पालन करने वाला व्यक्ति आत्मविश्वासी, संतुलित और नैतिक मूल्यों से युक्त होता है। अस्तेय के अनुष्ठान से मनुष्य निराभिमानी बनता है और लोभ-लालच से मुक्त होकर अहंकार-शून्यता की ओर अग्रसर होता है।
डॉ. नवीन सिंह ने यह भी बताया कि अस्तेय का अभ्यास करने से मन में स्थायी शांति का वास होता है। जब व्यक्ति दूसरे की वस्तुओं और उपलब्धियों की लालसा छोड़ देता है, तब उसके भीतर संतोष और कृतज्ञता का भाव उत्पन्न होता है। यही संतोष मानसिक तनाव को कम करता है और जीवन को सरल व आनंदमय बनाता है।
उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में अस्तेय का महत्व और भी बढ़ जाता है, जहाँ प्रतिस्पर्धा के कारण लोग नैतिक सीमाओं का उल्लंघन करने लगते हैं। यदि समाज में अस्तेय का भाव व्यापक रूप से अपनाया जाए, तो सामाजिक समरसता, विश्वास और सौहार्द में स्वतः वृद्धि होगी।
अंत में डॉ. सिंह ने बताया कि यम के अगले विभाग ब्रह्मचर्य पर विस्तार से चर्चा आगामी सत्र में की जाएगी। उन्होंने योग साधकों एवं आमजन से इस ज्ञान यात्रा से जुड़ने और अपने अनुभव साझा करने का आह्वान किया।
— डॉ. नवीन सिंह
योगाचार्य
पतंजलि योगपीठ हरिद्वार, यूनिट बस्ती

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