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कृषि विज्ञान केंद्र में 5 दिवसीय रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन
मौसमी फल-सब्जी व गन्ना आधारित उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती, 26 दिसम्बर 2025 (सू.वि.)।
कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती में चल रहे पांच दिवसीय रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन हुआ। यह प्रशिक्षण मौसमी फल-सब्जियों एवं गन्ना आधारित उत्पादों के मूल्य संवर्धन विषय पर आधारित था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर केंद्र प्रभारी डॉ. पी. के. मिश्रा ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि घरेलू स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण एवं लघु उद्योग स्थापित कर कम पूंजी में भी नियमित आय अर्जित की जा सकती है। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ व्यवहारिक रणनीतियाँ साझा कीं।
प्रशिक्षण की कोर्स कोआर्डिनेटर एवं गृह विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. अंजलि वर्मा ने प्रतिभागियों को मौसमी फल-सब्जियों एवं गन्ना आधारित उत्पादों के वैज्ञानिक प्रसंस्करण, पोषण संरक्षण, गुणवत्ता मानकीकरण तथा लागत-लाभ विश्लेषण की विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण को पूर्णतः हस्त-प्रयोग आधारित, सहभागी एवं रोजगारोन्मुख बनाया गया, जिससे प्रतिभागियों में आत्मविश्वास एवं उद्यमशील सोच का विकास हुआ।
डॉ. वर्मा ने विशेष रूप से घरेलू एवं बेरोजगार महिलाओं को स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के माध्यम से सामूहिक रूप से कार्य कर घर से ही मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार करने एवं आय अर्जन के लिए प्रेरित किया। साथ ही स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा मानकों, पैकेजिंग, लेबलिंग एवं बाजारोन्मुख उत्पाद विकास पर भी विशेष बल दिया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों द्वारा आंवला अचार, आंवला कैंडी, कांजी, मुरब्बा, मिक्स/नवरंग अचार, चटनी, सिरका एवं टमाटर सॉस जैसे उत्पाद सफलतापूर्वक तैयार किए गए।
केंद्र के पौध सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. प्रेम शंकर ने कीट-रोग नियंत्रण, स्वच्छता मानक एवं सुरक्षित भंडारण पर जानकारी दी। डॉ. वी. बी. सिंह ने उन्नत किस्मों, गुणवत्तायुक्त कच्चे माल के चयन एवं उच्च उत्पादकता पर प्रकाश डाला।
कृषि प्रसार वैज्ञानिक आर. वी. सिंह ने मूल्य संवर्धन आधारित उद्यमिता, विपणन संभावनाओं एवं सरकारी योजनाओं के माध्यम से स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी। वहीं डॉ. हरिओम मिश्रा (शस्य वैज्ञानिक) ने खाद्य प्रसंस्करण में प्रयुक्त लघु यंत्रों एवं ऊर्जा-दक्ष तकनीकों पर व्यावहारिक व्याख्यान दिया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 25 महिला प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की। यह कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार एवं आय सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।

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