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अनाहत चक्र के संतुलन से बढ़ती है करुणा, स्वास्थ्य और जीवन ऊर्जा
योग, एक्यूप्रेशर और प्राकृतिक आयुर्वेद चिकित्सा दे रहे बेहतर परिणाम : योगाचार्य डॉ. नवीन सिंह, निदेशक — संकल्प योग वैलनेस सेंटर, बस्ती

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती। मानव शरीर के सात प्रमुख चक्रों में अनाहत चक्र को प्रेम, करुणा, संतुलन और स्वास्थ्य का केंद्र माना गया है। यह चक्र हृदय क्षेत्र में स्थित होता है और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर गहरा प्रभाव डालता है। संकल्प योग वैलनेस सेंटर, बस्ती के निदेशक योगाचार्य डॉ. नवीन सिंह बताते हैं कि अनाहत चक्र को सक्रिय और संतुलित करने से न केवल भावनात्मक स्थिरता प्राप्त होती है, बल्कि यह हृदय, फेफड़ों और प्रतिरक्षा तंत्र को भी मजबूत बनाता है।
अनाहत चक्र का शरीर पर प्रभाव
अनाहत चक्र हृदय के मध्य भाग में स्थित ऊर्जा केंद्र है। डॉ. सिंह के अनुसार, यह चक्र रक्त संचार, श्वसन तंत्र, हृदय स्वास्थ्य, प्रतिरक्षा शक्ति और भावनात्मक संतुलन का संचालन करता है। जब यह चक्र असंतुलित होता है, तो व्यक्ति को बेचैनी, अकेलापन, असुरक्षा, संबंधों में तनाव, सांस की समस्या, हृदयधड़कन बढ़ने और प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
वहीं जब यह चक्र संतुलित होता है, तो व्यक्ति के भीतर प्रेम, करुणा, क्षमा, सकारात्मकता और संतुलित भावनाओं का विकास होता है। शारीरिक रूप से भी हृदय और फेफड़ों का कार्य बेहतर होता है, तनाव कम होता है और ऊर्जा स्तर बढ़ जाता है।
योग से अनाहत चक्र का संतुलन
डॉ. सिंह बताते हैं कि योगासन और प्राणायाम अनाहत चक्र को सक्रिय करने के सबसे प्रभावी माध्यम हैं। विशेष रूप से भुजंगासन, उष्ट्रासन, वृक्षासन, मात्स्यासन और गोमुखासन इस चक्र को खोलने में सहायक होते हैं।
अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और उज्जायी प्राणायाम हृदय क्षेत्र में ऊर्जा प्रवाह को संतुलित करते हैं, जिससे मानसिक तनाव कम होता है और मन में शांति का भाव पैदा होता है। नियमित ध्यान, विशेषकर “हृदय केंद्र ध्यान”, करुणा और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।
एक्यूप्रेशर द्वारा लाभ
एक्यूप्रेशर चिकित्सा भी अनाहत चक्र को सक्रिय करने में कारगर मानी जाती है। डॉ. सिंह बताते हैं कि हृदय मेरिडियन और फेफड़ा मेरिडियन के कुछ विशिष्ट बिंदुओं पर हल्का दबाव देने से न केवल रक्त संचार सुधरता है बल्कि तनाव और घबराहट जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
HT-7 (शेन मेन), P-6 (नेईगुआन) और LU-1 जैसे बिंदु मानसिक शांति, सांस संबंधी समस्याओं और भावनात्मक संतुलन में विशेष लाभकारी हैं।
प्राकृतिक आयुर्वेद से उपचार
आयुर्वेद में अनाहत चक्र का संबंध प्राण व सत्व गुण से माना गया है। तुलसी, अश्वगंधा, अर्जुन छाल, ब्राह्मी, शंखपुष्पी और गुलाब जैसे प्राकृतिक औषधीय पौधे हृदय व मन दोनों को मजबूत करते हैं।
डॉ. सिंह के अनुसार, नियमित रूप से गर्म पानी भाप, हर्बल काढ़ा, नस्य उपचार, अभ्यंग (तेल मालिश) और सूर्य नमस्कार से हृदय क्षेत्र में ऊर्जा का प्रवाह बेहतर होता है।
डॉ. सिंह का संदेश
योगाचार्य डॉ. नवीन सिंह का कहना है कि अनाहत चक्र का संतुलन केवल आध्यात्मिक आयाम ही नहीं बढ़ाता, बल्कि शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी नई दिशा देता है। योग, एक्यूप्रेशर और आयुर्वेदिक चिकित्सा मिलकर मानव स्वास्थ्य को संपूर्ण बनाते हैं। नियमित अभ्यास से व्यक्ति के भीतर करुणा, संतुलन और शांति का भाव विकसित होता है, जो जीवन को सुखी और सफल बनाने में मदद करता है।
अनाहत चक्र को जाग्रत कर व्यक्ति न केवल अपने स्वास्थ्य में सुधार ला सकता है बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेम का संदेश भी फैला सकता है।

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