उत्तर प्रदेशदेशधर्मबस्ती
भगवान भाव के भूखे हैं, सुनते हैं सच्चे मन की पुकार-मुक्तामणि शास्त्री
9 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती । किसी भी योनि का जीव भगवान को प्राप्त कर सकता है। जिस तरह गजेन्द्र नामक हाथी जब तालाब में स्नान कर रहा था तब मगरमच्छ ने उसका पांव पकड़ लिया, मदद की पुकार पर कोई नहीं आया तो भगवान ने उसकी मदद की। इस प्रकार भगवान को प्राप्त करने के लिए जीव योनि का कोई महत्व नहीं, उच्च योनि से लेकर निम्न योनि तक का कोई भी जीव भगवद् प्राप्ति कर सकता है। यह सद् विचार मुक्तामणि शास्त्री महाराज ने दुर्गा नगर आदर्श परिवार कटरा में चौथेे दिन व्यास पीठ से व्यक्त किया।
महात्मा जी ने कहा कि जब भी भक्त मदद के लिए भगवान को याद करता है, चाहे वह किसी भी योनि का हो भगवान उसको बचाते हैं। गजेद्र को भगवान ने बचाया, द्रौपदी की मदद भगवान कृष्ण ने की। भगवान भाव के भूखे हैं। सुनते हैं सच्चे दिल की पुकार। एक हाथी की पुकार सुनकर भगवान दौड़े आए, हाथी मनुष्य नहीं जीव था। दिल से पुकारने और दिखावे से पुकारने में अंतर है। महात्मा जी ने कहा कि हाथियों का परिवार रहता था, गजेंद्र हाथी इस परिवार का मुखिया था। एक दिन घूमते-घूमते उसे प्यास लगी, परिवार के अन्य सदस्यों के साथ ही गजेन्द्र पास के ही एक सरोवर से पाने पी कर अपनी प्यास बुझाने लगा, लेकिन तभी एक शक्तिशाली मगरमच्छ ने गजराज के पैर को दबोच लिया और पाने के अंदर खीचने लगा। मगर से बचने के लिए गजराज ने पूरी शक्ति लगा दी लेकिन सफल नहीं हो सका, दर्द से गजेन्द्र चीखने लगा। गजेन्द्र की चीख सुनकर अन्य हाथी भी शोर करने लगे, इन्होंने भी गजेन्द्र को बचाने का प्रयास किया लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। गजेंद्र जब सारे प्रयास करके थक गया और उसे अपना काल नजदीक आते दिखाई देने लगा तब उसने भगवान विष्णु का स्मरण किया और उन्हें पुकारने लगा। अपने भक्त की आवाज सुनकर भगवान विष्णु नंगे पैर ही गरुण पर सवार होकर गजेंद्र को बचाने के लिए आ गए। यह स्तुति यह बतलाती है कि जब सभी प्रयास विफल हो जाएं और कोई मार्ग न बचे, तब भी ईश्वर में अटूट विश्वास रखने वाला भक्त उनकी कृपा से सभी संकटों से मुक्त हो सकता है।
श्रीमद्भागवत कथा के क्रम में आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रमोद कुमार पाण्डेय, उपाध्यक्ष राकेश कुमार पाण्डेय आदि ने विधि विधान से कथा व्यास का पूजन अर्चन किया। श्रोताओं में मुख्य रूप से भगवान प्रसाद तिवारी, , रामचंद्र वर्मा, फूल चंद्र पांडेय, सर्वेश यादव, करीम खान कृष्ण मणि ओझा, जितेन्द्र पाडेय, विशाल ओझा, विवेक, बबलू यादव, यश पाण्डेय, सतीश चन्द्र मिश्र, राजेन्द्र सिंह, सुनील कुमार आर्या, राजेन्द्र पाण्डेय, रामचन्द्र वर्मा, कृष्ण कुमार तिवारी, दिनेश पाण्डेय ‘बब्लू’, सर्वेश यादव, राकेश पाण्डेय पिन्टू, उपेन्द्र पाण्डेय, जितेन्द्र पाण्डेय, अमरेन्द्र उपाध्याय, बुद्धि सागर ‘बब्लू’ के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलायें, भक्त शामिल रहे।

Subscribe to my channel


