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श्रीमद्भागवत कथा के लिये निकली कलश यात्रा, झांकी

बस्ती से वेदान्त सिंह

 

बस्ती । मंगलवार को दुर्गा नगर आदर्श परिवार कटरा में आयोजित 9 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ अवसर पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुये अमहट घाट स्थित सिद्धेश्वर मंदिर पहुंची, यहां से पवित्र कुंआनों का जल लेकर महिलायें, श्रद्धालु कथा स्थल पहुंचे। यहां विधि विधान से कलश स्थापना के बाद कथा आरम्भ हुई।

 भव्य कलश यात्रा में राधा, कृष्ण का सजीव नृत्य झांकी और भगवान शंकर के तांडव स्वरूप आकर्षण का केन्द्र रहा। जैसे ही सुसज्जित बग्गी पर विराजमान भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा जी नृत्य करते हुए नगर भ्रमण पर निकले, श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। मार्ग में “राधे-राधे”, “जय श्रीकृष्ण” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। इसके साथ ही भगवान शंकर की तांडव करती प्रतीकात्मक झांकी ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ढोल-नगाड़ों, शंख-ध्वनि, भजन-कीर्तन और पुष्प वर्षा के बीच यह ऐतिहासिक कलश यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए प्राचीन अमहटघाट तक पहुंची और वहां विधिवत पूजन के बाद पुनः कथा स्थल पर कलश स्थापना की गई।

कलश यात्रा में महिलाएं, बच्चे, युवा, बुजुर्ग, समाजसेवी, व्यापारी और ग्रामीण अंचल से आए श्रद्धालु कृ सभी ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। मार्ग में जगह-जगह आरती, पुष्प वर्षा और जलपान की व्यवस्था की गई थी। बच्चों के लिए यह झांकी केवल धार्मिक दृश्य नहीं, बल्कि संस्कारों की जीवंत पाठशाला बन गई

आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रमोद कुमार पाण्डेय ने कहा कि “श्रीमद् भागवत कथा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण का महासंगम है। उपाध्यक्ष राकेश कुमार पाण्डेय ने कहा यह कलश यात्रा नगर की आस्था का उत्सव बन गई।

श्रीमद् भागवत कथा का व्यासपीठ से श्री गणेश करते हुये पूज्य श्री मुक्तामणि शास्त्री महाराज ने कहा कि “श्रीमद् भागवत कोई ग्रंथ नहीं, वह साक्षात भगवान का हृदय है। जहां भागवत कथा होती है, वहां केवल शब्द नहीं, वहां स्वयं श्रीकृष्ण विराजमान होते हैं। ज्ञान और वैराग्य का विश्लेषण करते हुये महात्मा जी ने कहा कि सात दिन के भीतर परीक्षित को मुक्ति मिली। निश्चित था कि ठीक सातवे दिन उनका काल आने वाला है किन्तु हम काल को भूल जाते हैं। वक्ता शुकदेव जी जैसा अवधूत और श्रोता परीक्षित जैसा अधिकारी हो तो मुक्ति मिल जाती है।

कथा महिमा का वर्णन करते हुये महात्मा जी ने कहा कि भागवत कथा का आनन्द ब्रम्हान्नद से भी श्रेष्ठ है। योगी तो केवल अपना उद्धार करता है किन्तु सतसंगी साथ में आये सभी का उद्धार करते हैं। महात्मा जी ने देवर्षि नारद की वृन्दावन में भक्ति से भेंट, भक्ति का दुःख दूर करने के लिये नारद जी का उद्योग , भक्ति के कष्ट की निवृत्ति सहित अनेक प्रसंगो का विस्तार से वर्णन करते हुये महात्मा जी ने महर्षि व्यास के भागवत रचना के परम और मंगलकारी उद्देश्य पर प्रकाश डाला।

कलश यात्रा और कथा श्रवण में मुख्य रूप से सतीश चन्द्र मिश्र, राजेन्द्र सिंह, सुनील कुमार आर्या, राजेन्द्र पाण्डेय, रामचन्द्र वर्मा, कृष्ण कुमार तिवारी, दिनेश पाण्डेय ‘बब्लू’, सर्वेश यादव, राकेश पाण्डेय पिन्टू, उपेन्द्र पाण्डेय, जितेन्द्र पाण्डेय, अमरेन्द्र उपाध्याय, बुद्धि सागर ‘बब्लू’ के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलायें, भक्त शामिल रहे।

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

Vedant Singh

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