उत्तर प्रदेशदेशबस्तीब्रेकिंग न्यूज़शिक्षास्वास्थ्य
स्वाधिष्ठान चक्र सक्रिय होने से बढ़ती है ऊर्जा, संतुलन और रचनात्मकता
योग, एक्यूप्रेशर व प्राकृतिक आयुर्वेद चिकित्सा दे रही नए उपचार विकल्प — डॉ. नवीन सिंह, निदेशक, संकल्प योग वैलनेस सेंटर, बस्ती

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती। मानव शरीर में स्थित स्वाधिष्ठान चक्र भावनात्मक ऊर्जा, रचनात्मकता, प्रजनन क्षमता और जीवन के आनंद का प्रमुख केंद्र माना गया है। रीढ़ की हड्डी के ठीक ऊपर नाभि के नीचे स्थित यह चक्र शरीर के जल तत्व को नियंत्रित करता है। संकल्प योग वैलनेस सेंटर के निदेशक डॉ. नवीन सिंह बताते हैं कि जब स्वाधिष्ठान चक्र संतुलित रहता है, तब व्यक्ति में उत्साह, सौम्यता, आत्मविश्वास और भावनात्मक स्थिरता बढ़ती है। वहीं इसके असंतुलन से भावनात्मक उतार-चढ़ाव, तनाव, भय, थकान, अनियमित मासिक धर्म, पाचन में समस्या और कम ऊर्जा जैसी परेशानियां उत्पन्न होती हैं।
स्वाधिष्ठान चक्र के सक्रिय होने के मुख्य लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार, इस चक्र के संतुलित होने से शरीर और मन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
भावनात्मक संतुलन में सुधार: व्यक्ति क्रोध, तनाव और असुरक्षा से मुक्त होकर निर्णय क्षमता में सुधार पाता है।
ऊर्जा व जीवनशक्ति बढ़ती है: शरीर की थकान कम होती है और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है।
पाचन और प्रजनन स्वास्थ्य बेहतर होता है: यह चक्र प्रजनन तंत्र और निचले पेट के अंगों को नियंत्रित करता है, जिससे रोग कम होते हैं।
रचनात्मकता और आत्मविश्वास में वृद्धि: कला, संगीत, लेखन, भाषण और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में प्रगति होती है।
शारीरिक लचीलेपन में सुधार: कूल्हों, निचले पीठ और पेल्विक क्षेत्र की जकड़न दूर होती है।
योग से स्वाधिष्ठान चक्र का उपचार
डॉ. सिंह के अनुसार योग इस चक्र को संतुलित करने का सर्वोत्तम माध्यम है। कुछ प्रमुख योगासन इस प्रकार हैं—
बद्ध कोणासन, भुजंगासन, उष्ट्रासन, त्रिकोणासन, नटराजासन
नाड़ी शोधन प्राणायाम और भ्रामरी प्राणायाम मानसिक शांति प्रदान करते हैं।
ओम-वां (VAM) बीज मंत्र का उच्चारण चक्र में कंपन पैदा कर ऊर्जा को जागृत करता है।
नियमित योगाभ्यास से निचले पेट का रक्तसंचार बढ़ता है, ऊर्जा प्रवाह नियमित होता है और मानसिक स्थिरता विकसित होती है।
एक्यूप्रेशर से चक्र संतुलन में लाभ
एक्यूप्रेशर चिकित्सा में स्वाधिष्ठान चक्र को सक्रिय करने के लिए किडनी और स्प्लीन मेरिडियन के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर हल्का दाब दिया जाता है।
SP-6, CV-4, CV-6, K-3 जैसे बिंदुओं को दबाने से पेल्विक क्षेत्र की ऊर्जा बढ़ती है।
इन बिंदुओं पर 2–3 मिनट तक नियमित दबाव देने से पाचन, महिला स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन में तेजी से सुधार होता है।
एक्यूप्रेशर न केवल दर्द व तनाव को कम करता है बल्कि ऊर्जा प्रवाह को भी संतुलित करता है।
प्राकृतिक एवं आयुर्वेद चिकित्सा का योगदान
आयुर्वेद में स्वाधिष्ठान चक्र जल तत्व से जुड़ा माना गया है, इसलिए जल संतुलन को ठीक रखने वाली चिकित्सा अत्यंत प्रभावी होती है।
शतावरी, अश्वगंधा, गोखरू, धात्री जैसे जड़ी-बूटियाँ इस चक्र को संतुलित करने में सहायक हैं।
अभ्यंग (तेल मालिश) से निचले पेट और कूल्हों में ऊर्जा प्रवाह नियमित होता है।
गर्म पानी, नारियल पानी और तरल पदार्थों का सेवन चक्र की शक्ति बढ़ाता है।
ध्यान व जल तत्व ध्यान (Water Element Meditation) मानसिक शांति और भावनात्मक मजबूती प्रदान करता है।
जीवन में संतुलन का संदेश
संकल्प योग वैलनेस सेंटर बस्ती में स्वाधिष्ठान चक्र संतुलन के लिए योग, प्राणायाम, एक्यूप्रेशर और आयुर्वेद को मिलाकर सर्वांगीण चिकित्सा प्रदान की जा रही है। डॉ. नवीन सिंह का कहना है कि चक्रों का संतुलन केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, यह व्यक्ति की सोच, भावनाओं और जीवन की गुणवत्ता पर भी गहरा प्रभाव डालता है।
उन्होंने बताया कि यदि व्यक्ति प्रतिदिन 20–30 मिनट चक्र संतुलन के अभ्यास करें, तो कुछ ही दिनों में ऊर्जा, आत्मविश्वास और मानसिक शांति में आश्चर्यजनक सुधार देखने को मिलता है।

Subscribe to my channel


