
हरिद्वार, 9 दिसंबर 2025।
आयुष विभाग हरिद्वार द्वारा आशा कार्यकर्ताओं के लिए एक दिवसीय व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें उन्हें आयुष आधारित घरेलू उपचार, योग-प्राणायाम, जीवनशैली रोग प्रबंधन और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की सेवाओं के बारे में विस्तारपूर्वक प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. स्वास्तिक सुरेश और आयुष मिशन विशेषज्ञ डॉ. अवनीश उपाध्याय ने भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया।
🔹 आयुष आधारित स्वास्थ्य प्रणाली सबसे सुरक्षित: डॉ. स्वास्तिक सुरेश
उद्घाटन संबोधन में डॉ. स्वास्तिक सुरेश ने कहा कि आयुष पद्धतियाँ समुदाय को सुरक्षित, सरल और प्रभावी स्वास्थ्य समाधान प्रदान करती हैं। उन्होंने आशाओं को इन सेवाओं को घर-घर तक पहुँचाने वाली सबसे मजबूत कड़ी बताया।
🔹 आशाओं को दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण
आयुष मिशन विशेषज्ञ डॉ. अवनीश उपाध्याय ने आशाओं को—
जीवनशैली आधारित रोगों की रोकथाम
घरेलू आयुष उपचार
औषधीय पौधों की पहचान
रसोई-बगीचे का महत्व
पंचकर्म से जुड़े मूल सिद्धांत
आयुष थेरेपी का सुरक्षित उपयोग
जैसे विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी।
उन्होंने यह भी कहा कि “कई जगहों पर RMP जैसे लोग उपचार कर रहे हैं, जबकि प्रशिक्षित आशाएं वैज्ञानिक आयुष पद्धतियों से समुदाय को कहीं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ दे सकती हैं।”
🔹 नोडल अधिकारियों ने समझाए आयुष उपचार और योग के लाभ
नोडल अधिकारी डॉ. विक्रम सिंह रावत और सह-नोडल अधिकारी डॉ. विजेंद्र कुशवाहा ने आशाओं को घरेलू उपचार और जीवनशैली आधारित रोगों के कारणों की जानकारी दी।
उन्होंने विशेष रूप से हाइपरटेंशन, डायबिटीज, एनीमिया, मोटापा, अपच, सर्दी-खांसी आदि में—
योग
प्राणायाम
आहार-संशोधन
जल चिकित्सा
की भूमिका समझाई।
🔹 वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी ने बताई योजनाओं की उपयोगिता
वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. घनेंद्र वशिष्ठ ने होम स्टे योजना, ग्रामीण पर्यटन और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में उपलब्ध सेवाओं का विस्तार से विवरण दिया। उन्होंने बताया कि ये योजनाएँ न केवल स्वास्थ्य बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देती हैं।
🔹 “आशाएं स्वास्थ्य जागरूकता की प्रथम कड़ी”: डॉ. अवनीश
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. अवनीश उपाध्याय ने कहा कि आयुष उपचार, योग और औषधीय पौधों का ज्ञान आशाओं को और अधिक सक्षम बनाता है। यह प्रशिक्षण उनके कौशल में वृद्धि कर उन्हें आत्मनिर्भर और समुदाय के लिए अधिक उपयोगी बनाएगा।

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