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अनाहत चक्र संतुलन से बढ़ेगा प्रेम, करुणा और मानसिक शांति: डॉ. नवीन सिंह

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती। संकल्प योग वैलनेस सेंटर बस्ती के निदेशक डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि अनाहत चक्र मानव शरीर का अत्यंत महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्र है, जो प्रेम, करुणा, सहानुभूति व आध्यात्मिक उत्थान का मूल आधार माना जाता है। छाती के मध्य स्थित यह चक्र हिंदू, योगिक व तांत्रिक संस्कृति में हृदय की ऊर्जा का प्रतीक है। इसका तत्व वायु तथा बीज मंत्र “यं” है।
डॉ. सिंह के अनुसार, अनाहत चक्र के संतुलित होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम, दया, क्षमा और सकारात्मकता की भावनाएँ बढ़ती हैं, जबकि असंतुलन तनाव, अकेलापन, क्रोध, भय और संबंधों में बिगाड़ जैसी समस्याएँ उत्पन्न करता है।
योगिक व सांस्कृतिक महत्व
अनाहत चक्र को 12 पंखुड़ियों वाले हरे कमल के रूप में दर्शाया जाता है।
भारतीय योग संस्कृति में इसे आत्मा और जगत के बीच सेतु माना गया है।
मंत्र जप, ध्यान, पूजा और प्राणायाम के माध्यम से इसकी ऊर्जा को संतुलित किया जाता है।
अनाहत चक्र संतुलन के लाभ
डॉ. नवीन सिंह के अनुसार—
हृदय एवं श्वसन तंत्र की ऊर्जा में सुधार
भावनाओं में संतुलन और मानसिक शांति
संबंधों में सामंजस्य व संप्रेषण क्षमता बढ़ना
आत्मविश्वास, करुणा और सकारात्मकता में वृद्धि
तनाव, बेचैनी और नकारात्मक भावनाओं में कमी
आध्यात्मिक जागृति और आंतरिक आनंद का अनुभव
संकल्प योग वैलनेस सेंटर में उपलब्ध उपचार
अनाहत चक्र को संतुलित करने के लिए सेंटर में विशेष सत्र उपलब्ध हैं—
हृदय चक्र ध्यान (Heart Chakra Meditation)
अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, अनोहल प्राणायाम
बीज मंत्र “यं” जप एवं साउंड हीलिंग
उष्ट्रासन, मत्स्यासन, भुजंगासन जैसे हृदय खोलने वाले आसन
एक्यूप्रेशर, नैचुरोपैथी और ऊर्जा संतुलन थेरेपी
भावनात्मक हीलिंग एवं तनाव प्रबंधन सत्र
डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि प्रतिदिन कुछ मिनट ध्यान और सकारात्मक सोच के अभ्यास से अनाहत चक्र सक्रिय होकर जीवन को प्रेम, शांति और आनंद से भर देता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में योग और ध्यान को शामिल कर हृदय ऊर्जा को प्रबल बनाएं।
— डॉ. नवीन सिंह
निदेशक, संकल्प योग वैलनेस सेंटर बस्ती

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