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मेंढर स्पोर्ट्स फेस्ट 2025 – गर्ल्स खो-खो चैम्पियनशिप रोमांचक मुकाबलों के साथ शुरू

ब्यूरो चीफ राजेश कुमार, पुंछ
मेंढर, 29 नवम्बर:
मेंढर बॉयज़ हायर सेकेंडरी स्कूल के धूल भरे मैदान में आज से गर्ल्स खो-खो चैम्पियनशिप का आगाज़ हुआ। टूर्नामेंट में छह टीमें – GHSS मेंढर, GHS उचाड, GHSS मेंढर, GHS गोहलाड़, GDC मेंढर और GHS मांकॉट – एक-दूसरे के खिलाफ भिड़ीं। पहले मैच में खिलाड़ियों की तेजी, तेज मोड़ और शानदार टैगिंग ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। खासकर GDC मेंढर और GHSS मेंढर के बीच मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा, जिसमें स्कोर बार-बार बदलता रहा और अंत में GHSS मेंढर ने 12-9 से जीत दर्ज की, जिसके बाद दर्शकों की तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी।
चैम्पियनशिप के मुख्य अतिथि CO मेंढर बटालियन ने सभी को सम्बोधित करते हुए कहा, “आपकी गति, टीमवर्क और कभी हार न मानने वाला जज्बा हमारे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक है।” उन्होंने हर रन और टैग की सराहना की और लड़कियों को यह संदेश दिया कि उनका हर प्रयास मजबूत और एकजुट मेंढर बनाने में योगदान देता है और उनके भविष्य के नए अवसर खोलता है।
यह टूर्नामेंट भारतीय सेना के ऑपरेशन सद्भावना का हिस्सा है, जिसे मेंढर बटालियन और भिंबर गली ब्रिगेड द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं के लिए सुरक्षित मंच प्रदान करना, सामुदायिक जुड़ाव बढ़ाना और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षण एवं करियर अवसरों से जोड़ना है।
खेल के मैदान में दौड़ती, टैग करती और रणनीति बनाती लड़कियां स्टीरियोटाइप्स तोड़ रही हैं और दिखा रही हैं कि वे नेतृत्व कर सकती हैं और उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं। उनके प्रदर्शन पर परिवार, शिक्षक और साथी छात्रों की प्रशंसा उनके आत्मविश्वास और अनुशासन को और मजबूत बनाती है। इस पहचान से उन्हें स्कॉलरशिप, कोचिंग और भविष्य में खेलों में रोजगार के अवसर भी मिल सकते हैं।
खो-खो, भारत का प्राचीन टैग गेम है, जिसकी उत्पत्ति महाभारत काल से मानी जाती है। यह खेल तीव्र गति, फुर्ती और तेज सोच की मांग करता है और समय के साथ राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में विकसित हुआ है। मेंढर टूर्नामेंट इस खेल की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक युवाओं को सक्रिय और उनके जड़ों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करता है।
आगे आने वाले कार्यक्रमों में 1 दिसंबर को एथलेटिक्स, 2-5 दिसंबर को क्रिकेट टूर्नामेंट, 9 दिसंबर को मेंढर मैराथन और 11 दिसंबर को ग्रैंड फिनाले जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, पुरस्कार वितरण और पूर्व सैनिकों की बैठक शामिल होगी, और भी रोमांच, सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय प्रतिभाओं के लिए अवसर प्रदान करेंगे।

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