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कीर्ति पंकज नंदा ने गौसेवा, पूजन और यज्ञ कर मनाया वैवाहिक वर्षगांठ

बस्ती 28नवम्बर।
वर्तमान परिवेश में अपने जन्म दिवस और वैवाहिक वर्षगांठ पर आमतौर पर लोग अपने परिवार इष्ट मित्रों को भोजन कराते हैं और उनसे आशीर्वाद और उपहार प्राप्त करते हैं पर ऐसा कम देखने में आता है कि कोई अपने वैवाहिक वर्षगांठ के अवसर पर गोवंश को हरा चारा फल चोकर गुड़ आदि खिलाकर उनका पूजन कर अपना वैवाहिक वर्षगांठ मनाता हो। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें विवेक गिरोत्रा और ओम प्रकाश आर्य की प्रेरणा से पंकज नन्दा और कीर्ति नंदा ने अपने परिवार मित्रों के साथ श्री गौशाला कठार जंगल में जाकर गौ सेवा करते हुए उन्हें हरा चारा केला, गुड़ और चोकर मिश्रित भोजन कराया और वैदिक यज्ञ कर अपने सुखी दांपत्य जीवन की कामना की। इस अवसर पर यज्ञ कराते हुए ओमप्रकाश आर्य प्रधान न्यासी श्री गौशाला कठार जंगल बस्ती ने बताया कि जब आत्मा शरीर को छोड़ देती है तो शरीर मर जाता है अर्थात निष्क्रिय, निष्प्राण, तेजहिन हो जाता है। गो भारत सरीखे कृषि प्रधान देश की आत्मा है और यदि गो इस देश को छोड़ कर चली गयी तो भारत देश आत्मा के बिना शरीर मात्र रह जाएगा। प्राचीन काल में तो संपत्ति का मापदण्ड भी गोधन को ही माना जाता था। भारतीय संस्कृति एवं परंपरा में भारतमाता और गोमाता दोनों ही समानरूप से सेवा और रक्षा के पात्र रहे हैं। जब आर्यों का राज्य था तब ये महोपकारक गाय आदि पशु नहीं मारे जाते थे। तभी आर्यावर्त व अन्य देशों में बड़े आनंद से मनुष्य आदि प्राणी रहते थे क्योंकि दूध, घी, बैल आदि पशुओं की बहुताई होने से अन्न रस बहुत होते थे।
जब से विदेशी मांसाहारी इस देश में आकार गौ आदि पशुओं को मरने वाले राज्याधिकारी हुए है तब से क्रमश: आर्यों के दु:खों की बढ़ती होती जाती है। एक गाय अपने जीवन काल में मनुष्य के ऊपर अनन्त उपकार करती है। अपनी मां तो कुछ समय तक ही दूध पिलाती है। पर गौमाता आजीवन दूध पिलाती है। गाय से ही पूरी खेती हो सकती है जिससे रोगमुक्त हो सकते हैं। गौमाता की सेवा करके हम कई असाध्य रोगों से छुटकारा पा सकते हैं। महर्षि दयानन्द सरस्वती ने कहा था कि “गवादि पशु और कृषि आदि कर्मों की रक्षा वृद्धि होकर सब प्रकार के उत्तम सुख मनुष्यादि प्राणियों को प्राप्त होते है। पक्षपात छोड़कर देखिये, गौ आदि पशु और कृषि आदि कर्मों से सब संसार को असंख्य सुख होते है वा नहीं। एक गाय कि एक पीढ़ी में चार लाख पचहत्तर हजार छ: सौ मनुष्यों का पालन होता है और पीढ़ी पर पीढ़ी बढ़ा कर लेखा करें तो असंख्य मनुष्यों का पालन होता है।
इस अवसर पर सुजाता विवेक गिरोत्रा, ज्ञानू पांडे सपत्नीक विभोर प्रताप सिंह चरणजीत सिंह सपत्नीक सरदार बॉबी सिंह सपत्नीक संजय कुमार गाड़िया चंद्रशेखर मिश्र सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
गरुण ध्वज पाण्डेय

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