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रुद्रपुर में 500 करोड़ का भूमि घोटाला उजागर, घोटाले की भूमि पर बनने जा रहा है, करोड़ों रुपए का प्रोजेक्ट, पूर्व सभासद ने लगाए गंभीर आरोप

A ₹500 crore land scam has been exposed in Rudrapur. A multi-crore project is being built on the scam-hit land. A former councilor has leveled serious allegations.

ब्यूरो रिपोर्ट… रामपाल सिंह धनगर

रुद्रपुर। रुद्रपुर में एक बड़े भूमि घोटाले का मामला सामने आया है। पूर्व सभासद रामबाबू ने गुरुवार को सिटी क्लब में पत्रकारों को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि, किच्छा–रुद्रपुर बाईपास रोड स्थित झील के सामने, राजस्व ग्राम लमरा, खसरा संख्या 02 में स्थित 4.07 एकड़ सरकारी भूमि को नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से फ्रीहोल्ड किया गया है।

उन्होंने बताया कि यह भूमि रोड से लगभग 25–30 फीट गहरी है, जो जलमग्न क्षेत्र में आती है। यह भूमि नगर पालिका रुद्रपुर द्वारा 7 दिसंबर 1988 को मछली पालन के लिए नीलाम की गई थी। अधिशासी अधिकारी नगर पालिका रुद्रपुर ने नीलामी प्रस्ताव की स्वीकृति के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी नैनीताल के माध्यम से शासन को प्रस्ताव भेजा था।

शासन द्वारा 16 दिसंबर 1993 को भेजे गए पत्र में स्पष्ट कहा गया था कि यह भूमि मछली पालन के लिए केवल दो वर्ष की अवधि के लिए ही दी जा सकती है। यदि नगर पालिका अथवा बोलीदाता भूमि लेना चाहते हैं, तो उन्हें 15 दिन के भीतर सहमति देनी होगी। किंतु, किसी भी बोलीदाता द्वारा सहमति नहीं दी गई।

 

पूर्व सभासद रामबाबू ने बताया कि इसके बावजूद उच्च बोलीदाताओं ने अपने कब्जे को वैध बताते हुए उच्च न्यायालय इलाहाबाद (लखनऊ बेंच) में रिट दायर कर स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आदेश भ्रामक तथ्यों के आधार पर लिया गया, क्योंकि जब शासन स्तर पर लीज/पट्टे की स्वीकृति ही नहीं हुई थी, तो कब्जा वैध कैसे माना जा सकता है?

 

उन्होंने बताया कि नीलामी की शर्त क्रमांक आठ में स्पष्ट उल्लेख है कि लीज डीड की कार्यवाही पूर्ण होने के बाद ही पट्टेदार को प्लॉट का कब्जा दिया जाएगा।

इसके बावजूद, नीलामी में शामिल महेन्द्र छाबड़ा, जिसका 20 प्रतिशत हिस्सा था, उसने वर्ष 2005 में — यानी नीलामी के 17 वर्ष बाद — अपने चार साझेदारों से शपथपत्र लेकर तत्कालीन सचिव आवास विभाग के से मिलीभगत कर उक्त भूमि को अपने, व अपने दो भाइयों और पिता के नाम पर फ्रीहोल्ड करवा लिया। बाकी चार साझेदारों को किनारे कर दिया गया।

रामबाबू ने बताया कि वर्ष 2007 में बर्ष 2000 प्रति के सर्किल रेट पर यह भूमि अवैध रूप से फ्रीहोल्ड कर दी गई। इस प्रकरण में तत्कालीन जिलाधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी (नजूल) ने शासन को क्रमशः 4 अप्रैल 2006 और 25 नवम्बर 2006 को भेजे पत्रों में स्पष्ट उल्लेख किया कि रुद्रपुर में महायोजना लागू है, जिसमें यह भूमि “जलमग्न खुला क्षेत्र” के रूप में दर्ज है। ऐसी भूमि को फ्रीहोल्ड करने का कोई प्रावधान नहीं है।

इसके बावजूद तत्कालीन सचिव ने सभी नियमों की अनदेखी करते हुए अधिकारीयों पर दबाव बनाकर फ्रीहोल्ड की प्रक्रिया पूरी करवाई।

रामबाबू (पूर्व सभासद) ने आगे बताया कि उनके द्वारा प्रेषित जन शिकायतों के बाद शासन ने तत्कालीन जिलाधिकारी जुगल किशोर पंत की निगरानी में अपर जिलाधिकारी (नजूल) जय भारत सिंह से जांच कराई। जांच में पाया गया कि आवेदक द्वारा वास्तविक तथ्यों को छिपाकर उक्त भूखंड फ्री होल्ड कराया गया।

तथा जांच रिपोर्ट में यह भी तथ्य सामने आया है कि फ्री होल्ड विलेख में राजस्व ग्राम लमरा, खसरा संख्या 02 को काटकर ग्राम रम्पुरा, खसरा संख्या 156 अंकित किया गया हैं, सके समर्थन में कोई शासनादेश या सक्षम अधिकारी की स्वीकृति नहीं थी। जांच में यह फ्री-होल्ड विलेख नियम विरुद्ध पाया गया और विलेख निरस्त करने की संस्तुति शासन को भेजी गई।

रामबाबू ने बताया कि शासन के तत्कालीन अपर सचिव ने इस रिपोर्ट को दबाते हुए मामला पुनः जॉच हेतु निवर्तमान जिलाधिकारी ऊधमसिंहनगर के पास भेज दिया। इसके बाद 26 और 28 नवंबर 2024 के आधार पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने उसी दिन पिछली जांच समाप्त कर, आवेदकों को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दि, और मछली तालाब की भूमि पर मॉल निर्माण की स्वीकृति प्रदान कर दी गई,

उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में एक प्रभावशाली नेता और एक बिल्डर की मिलीभगत है। जो अब इस तालाब की भूमि पर लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से विशाल मॉल प्रोजेक्ट के लिए उपयोग में लाने जा रहे है।

रामबाबू ने बताया कि जिन लोगों के नाम पर फ्रीहोल्ड हुआ है, वे 36 प्रतिशत के हिस्सेदार हैं, जबकि बाकी हिस्से बिल्डर और संबंधित नेता से जुड़े उद्योगपति के नाम पर हैं।

उन्होंने कहा कि नगर निगम की भूमिका भी संदिग्ध है। निगम ने स्वयं लिखा है कि प्रश्नगत भूखंड की मूल पत्रावली कार्यालय में उपलब्ध नहीं है, फिर भी निगम ने 2739 वर्ग मीटर भूमि का दाखिल-खारिज कर दिया। यह निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

रामबाबू ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों, नेताओं व बिल्डर पर कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि जनता का विश्वास शासन-प्रशासन में पुनः स्थापित हो सके।

Anita Pal

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