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सुरक्षा सर्वोपरि: शांति निकेतन विद्यालय में बिना हेलमेट ‘नो एंट्री’
सड़क सुरक्षा जागरूकता : छात्रों ने हेलमेट पहनकर निकाली बाइक रैली

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
बालोतरा: सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए शांति निकेतन विद्यालय, बालोतरा ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब, बुधवार, 1 अक्टूबर 2025 से स्कूल परिसर में दुपहिया वाहन चालकों—छात्रों, कर्मचारियों और अभिभावकों—के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। इस नियम का उल्लंघन करने पर परिसर में प्रवेश नहीं मिलेगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसी को मध्यनजर रखते हुए शांति निकेतन विद्यालय के 98 विद्यार्थियों द्वारा सड़क सुरक्षा जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। बाइक रैली शांति निकेतन स्कूल से होते हुए पुराना पादरू बस स्टैंड, पुलिस थाना, फर्स्ट फाटक, मनमोहन स्वीट होम, सेकंड फाटक, हनुमंत सराय से रिटर्न होकर विद्यालय पहुंची l रैली का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और सुरक्षित सड़क व्यवहार के बारे में लोगों को जागरूक करना था।
विद्यार्थियों ने सड़क सुरक्षा के महत्व को बढ़ावा देने के लिए एक रैली निकाली, जिसमें वे हेलमेट पहनकर सड़कों पर निकले ताकि अन्य लोगों को भी हेलमेट पहनने और सुरक्षित रहने के लिए जागरूक किया जा सके।
सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाना और लोगों को हेलमेट पहनने के लिए प्रोत्साहित करना। इस रैली में छात्रों के साथ प्राचार्या सुधा मदान और स्कूल के शिक्षक शामिल थे। रैली के दौरान छात्रों ने “हेलमेट पहनो, सीट बेल्ट लगाओ, हमें सुरक्षित घर लौटना है” जैसे नारे लगाते हुए मार्च किया। रैलियाँ सड़कों पर सुरक्षित व्यवहार को बढ़ावा देने और दुर्घटनाओं की रोकथाम में सहायक होती हैं।
यह निर्णय न केवल ज़िले में लागू अनिवार्य हेलमेट नियम के मद्देनज़र लिया गया है, बल्कि विद्यालय के दो छात्रों की सड़क दुर्घटना में गंभीर चोट की दुखद घटना से प्रेरित होकर, स्कूल प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की ठानी है कि परिसर और बाहर, सभी की सुरक्षा को पहली प्राथमिकता दी जाए।
*जीवन रक्षा की पहल: हेलमेट ही प्रवेश द्वार*
विद्यालय मीडिया प्रभारी एवं एकेडमिक कोऑर्डिनेटर अयूब के. सिलावट ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना और बच्चों में कम उम्र से ही हेलमेट पहनने की आदत डालना है।
प्राचार्या सुधा मदान ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि “हेलमेट न होने से लोग सड़कों पर दुर्घटना का शिकार होकर अपनी जान गंवा रहे हैं। हेलमेट पहनना केवल एक नियम नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा है। उन्होंने सड़क चिह्नों को समझने, दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट और चौपहिया वाहन में सीट बेल्ट लगाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
स्कूल सेक्रेटरी ओमप्रकाश चोपड़ा एवं ट्रस्टी प्रकाश बालड ने इस निर्णय पर प्रकाश डालते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि छात्रों और उनके परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता देना है। हेलमेट पहनने की आदत जिम्मेदार नागरिक बनने की ओर पहला कदम है। इस पहल के माध्यम से हम सड़क सुरक्षा के महत्व को हर व्यक्ति तक पहुंचाना चाहते हैं।”
*अभिभावकों पर भी नियम लागू*
यह अनिवार्यता केवल छात्रों तक सीमित नहीं है। स्कूल प्रबंधन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जो अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल लाएँ या वापस लेकर जाएँ, वे हेलमेट पहनकर ही आएं। स्कूल परिवार ने हेलमेट के बिना स्कूल में प्रवेश को पूरी तरह वर्जित कर दिया है। जागरूकता बढ़ाने के लिए सेमिनार और छोटे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
*यातायात नियमों का रखें विशेष ख़्याल*
विद्यालय प्रशासन ने सभी से अपील की है कि वे यातायात नियमों का सख्ती से पालन करें। प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर आरती गोयल ने बताया कि दुपहिया वाहन चलाते वक्त चालक और पीछे बैठने वाले दोनों के लिए हेलमेट अनिवार्य है। उन्होंने विद्यार्थियों को ट्रैफिक सिग्नल, ज़ेब्रा क्रॉसिंग, और स्टॉप लाइन का पालन करने के साथ ही, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग न करने की सख्त हिदायत दी, क्योंकि यह दुर्घटना का कारण बनता है।
*यातायात सुरक्षा के मुख्य बिंदु:*
* दोनों हेलमेट: स्कूटी चलाते वक्त चालक और पीछे बैठने वाले दोनों हेलमेट पहनें।
* इंडिकेटर/हॉर्न: मुड़ने से पहले इंडिकेटर दें; हॉर्न का अनावश्यक प्रयोग न करें।
* बचें: गलत दिशा में न चलें और ओवरटेक से बचें।
* सीमित सवारी: दो पहिया वाहनों पर दो से ज़्यादा लोग न बैठें।
स्कूल प्रबंधन ने विश्वास जताया है कि यह कदम न केवल बच्चों और अभिभावकों का जीवन सुरक्षित रखेगा, बल्कि समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने में भी सफल होगा।

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