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किसानो का दर्द आखिर कौन देखेगा फसल आने के बाद किसान मजबूर क्यो
बेबसी के आशु बहाता किसान

लोकेशन=सलेहा।मध्य प्रदेश पन्ना
ब्यूरो चीफ=सुधीर अग्रवाल
मो.9111197808
सरकार जो भी नियम कानून बनातीं बह ऐसी चैंबर में बैठ कर बनाए जाते है जो कि धरातल से कोषों दूर होते है किसानों के लिए शासन प्रतिबद्ध है की किसी भी प्रकार से किसानों का शोषण नहीं होगा लेकिन शासन की प्रतिबद्धता इसी से नजर आ रही है कि किसान हर फसल में बेबसी के आंसू बहाता है चाहे वह धन हो चाहे वह गेहूं चाहे वह कोई भी अन्य फसल बिना नुकसान के उसकी फसल शासन तक नहीं पहुंचती शासन के पास व्यवस्था न होना किसान की क्या गलती क्यों शासन लाखों कुंटल अनाज को पानी में बहा रही है
ऐसा ही नजारा सलेहा उपार्जन केंद्रों का है जहां कल की बारिश में गेहूं भीगता नजर आ रहा है।अब किसान करे तो करे क्या।
सलेहा क्षेत्र के एक किसान ने कहा की परिवाहन नहीं होने से हमारे द्वारा तुलाए गए गेहूं की राशि नहीं आ रही है हमारे सिर में कर्ज बढ़ता जा रहा कर्ज लेने वाले खड़े रहते हैं सलेहा के उपार्जन केंद्र में परिवाहन में देरी के कारण 300 किसान विभिन्न समास्या से जूझ रहा है क्योंकि इनकी राशि अटकी है।आखिर किसानों की यह हालत देखकर शासन का दिल क्यों नहीं पश्चिजता।किसान के पास रोने के अलावा कुछ नहीं बचा। ऐसी स्थिति में किसानों का शासन से भरोसा उठता जा रहा है।

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