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आफत में जान झोलाछाप डॉक्टर का क्लीनिक सील होने के बावजूद भी बेखोफ होकर डॉक्टर कर रहें इलाज

चचोर तहसील रामपुरा जिला नीमच मध्य प्रदेश
जी हां चचोर में झोलाछाप डॉक्टर के आगे स्वास्थ्य विभाग नतमस्तक होते दिख रहे हैं। कई बार कार्यवाही और क्लीनिक सील होने के बावजूद भी यह अंदरूनी तरीके से अपना क्लीनिक संचालित कर, लोगों की जान जोखिम में डाल रहा है। लोगों का इलाज कर रहा है। जिससे कभी भी कोई अनहोनी हो सकती है । लगता है स्वास्थ्य विभाग कोई बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा। पिछली बार भी लीपा पोती के नाम पर कार्रवाइयों की गई जो सिर्फ नाम मात्र की साबित हुई।पिछली बार भी इसी झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही की वजह से सालिया खेड़ी के एक मासूम की जान आफत में आई जो आज भी जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। जिसके पुट्ठे पर इंजेक्शन लगाया वह पुट्ठा पककर एक महामारी का रूप ले लिया जीसका ऑपरेशन हुआ और फिर आज तक उसका इलाज चल ही रहा है। ऐसा ही एक इंजेक्शन चचोर निवासी एक व्यक्ति को 2019-20 में लगाया था जिसका पुट्ठा पक कर रूद्र रूप ले लिया था जिनका ऑपरेशन भी हुआ। और उसकी पीड़ा झेल रहा है। जो अपने आप को बेकसूर साबित करने के लिए मनगढ़ंत तरीके अपना रहा और एक दूसरे से जुगाड़ कर पैसों के दम पर गवाहों को लालच दे रहा। अपने आप को बेकसूर साबित कर झूठी गवाही देने के लिए लालच दे रहा। सूत्र बताते हैं कि गांव के ही एक नॉमिनेट रईस व्यक्ति का हाथ सर पर होने से यह अपनी दुकान संचालित कर रहा।अपने आप को किसी भी तरह से बेकसूर साबित करने के लिए कई तरह के नए-नए हथकंडे अपना रहा छोला छाप डॉक्टर।पीड़ित व्यक्ति और गवाहों को भविष्य में कोई दुर्घटना घटित होती है। तो कौन जिम्मेदार।भविष्य में इन ऑपरेशन हुए जीवित व्यक्तियों के साथ कोई घटना घटित होती है तो कौन होगा इनका ज़िम्मेदार, ऊपर बैठे आका जिनके इशारों पर यह इन बंगालियों के क्लिनिक संचालित हो रहे हैं या फिर स्वास्थ्य विभाग जो इनके आगे नत मस्तक है। या फिर ये झोलाछाप डॉक्टर आखिर कौन इनका जिम्मेदार ।आखिर इतनी कारवाइयां होने के बावजूद भी किन के इशारे पर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रहे फर्जी क्लिनिक और पनप रहे। दिन पर दिन ग्रामीण क्षेत्र में अपने पैर पसार रहे बंगाली डॉक्टर। ना कानून का डर ना विभाग का डर हैं।कौन दे रहा है। इनको पनाह। दिन दुना रात चौगुनी होती जा रही। इन बंगाली डॉक्टरो की और कई लोग महामारियों के शिकार हो चुके जो ग्रामीण क्षेत्रों में ही दब कर रह गए आखिर कब तक यह झोलाछाप इस तरह का तांडव खेलेंगे।। क्यों उनके सामने नतमस्तक होते दिख रहे स्वास्थ्य विभाग क्या कारण।। आखिर इनके ऊपर कठोर से कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्लिनिक सील करने के बावजूद भी यह बेख़ौफ़ होकर चला रहे हैं अपना क्लीनिक,,,,
ब्यूरो रिपोर्ट,,, दशरथ माली चचोर

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