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अपरिग्रह विषय पर विद्वत संगोष्ठी का आयोजन

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग बालोतरा
श्री वर्धमान जैन स्थानक वासी संस्थान बालोतरा के चातुर्मास में में विराजित आचार्य श्री हीरा चंद्र जी महाराज साहब के आज्ञानुवर्ती श्रर्दैय श्री गौतम मुनि जी महाराज साहब आदि ठाणा के मंगल सानिध्य में 13 अक्टूबर को अपरिग्रह विषय पर विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया गया । स्थानक भवन में आयोजित विद्वत संगोष्ठी में मधुर व्याख्यानी श्री गौतम मुनि ने जीवन में अपरिग्रह की आवश्यकता पर सुंदर प्रवचन फरमाया, कहा कि धन के परिग्रह के तीन कलंक है, यह धन साथ नहीं जाता है, यह जीवन में हमेशा रहेगा यह भी जरूर नहीं है, और धन से सुख प्राप्त होगा यह भी निश्चित नहीं है। अपरिग्रह की महता दर्शाते हुए ममत्व घटाते हुए, संतोष, जो पास है,वो पर्याप्त है की बात फ़रमाई। श्रर्दैय श्री अविनाश मुनि जी महाराज ने अपरिग्रह की पांच विशेषताओं को फरमाते हुए कहा कि सब के जीवन में इसकी परम आवश्यकता है, एवं इसकी उपयोगिता के बारे में सार गर्भित विचार प्रस्तुत किए । जिनवाणी के प्रधान संपादक डॉ धर्मचंद जैन जयपुर ने संग्रह वृत्ति के मनोवैज्ञानिक कारणों का विवेचन किया, जीवो में जन्मजात परिग्रह संज्ञा होती है, संग्रह का कारण भी बतायें तथा संग्रह से और परिग्रह से होने वाले दुष परिणाम के बारे में भी जानकारी दी। रत्न व्यवसायी विद्वान जितेंद्र डागा ने अपरिग्रह को श्रावक अपने जीवन व्यवहार में कैसे जीता है ,उसके अनेक उदाहरण के माध्यम से ,आगम तथा जीवन व्यवहार के उदाहरण प्रस्तुत किए । विदुषी डॉ सुषमा सिंघवी ने अपरिग्रह का वैश्विक परिचय बताते हुए विदेशी विद्वानों के मंतव्य में अपरिग्रह विषय के संदर्भ में विचार प्रस्तुत किए ।शिक्षण बोर्ड के रजिस्ट्रार धर्मचंद जैन ने आचारंग सूत्र, आगम में अपरिग्रह का विश्लेषण करते हुए अनेक सूत्रों के माध्यम विषय पर जानकारी प्रदान की। पाली की विदुषी बहन अनुपमा गोलेच्छा ने अपरिग्रह को शांति का मार्ग बताते हुए अनेक प्रसंगों के माध्यम से विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। विशेषज्ञ त्रिलोक चंद जैन जयपुर ने प्रश्न व्याकरण सूत्र के एवं आगमों में परिग्रह के स्वरूप का वर्णन करते हुए उसके 30 पर्यायवाची नामों से उसकी भयावहता प्रदर्शित की। श्री वर्धमान जैन स्थानकवासी संस्थान मंत्री ओम बांठिया ने आचार्य श्री हस्तीमल जी महाराज साहब द्वारा समाज, राष्ट्र में विद्वानों के महत्व को आगे बढ़ाते हुए विद्वत संगोष्ठी के रूप में किए गए शुभारंभ कार्य, वर्तमान में आचार्य श्री हीराचंद जी महाराज साहब एवं मधुर व्याख्यानी श्री गौतम मुनि जी महाराज साहब द्वारा विद्वानों के माध्यम से आगम के सार गर्भित रहस्यों एवं ज्ञान अभिवृद्धि के क्रम को विद्वत संगोष्ठी को विशेष उपकारी कार्यबताया। डूंगर भवन में संघ अध्यक्ष मोतीलाल हुंडिया ,चातुर्मास समिति संयोजक शांतिलाल अन्याव, साधर्मी वात्सल्य लाभार्थी श्रीमती मंजुला देवी पारसमल गोगड़ (हीरामणि ग्रुप), सहित पदाधिकारी , श्रावक, श्राविका मण्डल द्वारा विद्वानों का संघ द्वारा सम्मान किया गया। बालोतरा के सैकड़ो नागरिकों, बुद्धिजीवियों के साथ ही जयपुर संघ, खेरली संघ, सवाई माधोपुर संघ सहित अन्य क्षेत्रों के श्रावक श्राविका, युवा वर्ग ने भाग लिया





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