देशबीकानेरब्रेकिंग न्यूज़राजस्थानराज्य

भारत के प्रथम पी डी ए आधारित पार्टी बनाने वाले नेता जोगेंद्र नाथ मण्डल की करुण कहानी:ढाका फाइल्स

बीकानेर से डॉ. राम दयाल भाटी की रिपोर्ट

 

भारत के प्रथम पी डी ए आधारित पार्टी बनाने वाले नेता जोगेंद्र नाथ मण्डल की करुण कहानी:ढाका फाइल्स

आज चुनावी फायदे के लिए अनेक इंडी गठबंधन के नेता पिछड़ा, दलित मुस्लिम – भाई भाई का नारा लगाते हैं।बी जे पी को दलित विरोधी,आरक्षण विरोधी,संविधान विरोधी ठहराने के लिए फर्जी पोस्ट व वीडियो बना कर बड़ी बेशर्मी से सोशल मीडिया में उछाल रहे हैं।

जो लोग अतीत से सबक नहीं लेते उनका वर्तमान व भविष्य अंधकारमय हो जाता है।

जोगेंद्र नाथ मंडल देश की आज़ादी के समय अत्यंत प्रभावशाली दलित नेता थे।वे जिन्ना के अभिन्न मित्र थे व उन्होंने दलित मुस्लिम भाई भाई का नारा दिया।श्री अम्बेडकर ने उन्होंने बहुत समझाया कि मुस्लिम भाईचारा सिर्फ मुस्लिमों के लिए ही लागू होता है।अधिकांश मुस्लिम और उनके नेता यह मानते हैं कि कुरान के अनुसार सभी गैरमुस्लिम काफिर हैं व उनका कत्ल कोई गुनाह नही है,इससे 72 हूरों सहित जन्नत मिलती है।परन्तु उन्होंने अम्बेडकर साहब की एक न सुनी।

पूर्वी पाकिस्तान के सीमावर्ती जिला सिलहट के विलय का फैसला मतगणना से होना था क्योंकि वहां हिन्दू मुस्लिम आबादी समान थी।जिन्ना ने मण्डल के सहयोग से दलित वोटों को पाकिस्तान के पक्ष में करवा दिया,जिसके फलस्वरूप इस जिले का लगभग 3000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा बना।

उन्हें उपकृत करते हुए उन्हें पाकिस्तान का कानून मंत्री बनाया गया।उनके आश्वासन के बाद दलित वर्ग पाकिस्तान में ही रुक गया।पूर्व पाकिस्तान में उनकी जनसंख्या लगभग तीस प्रतिशत थी।

कुछ समय बाद ही जोगेंद्र नाथ मण्डल का मोह भंग हो गया और सन 1950 में उन्होंने भारत मे शरण ली।जिंदगी भर अपनी सोच पर पछताते हुए सन 1968 में गुमनामी में उन्होंने शरीर छोड़ा।

दलितों को पाकिस्तान में इस्लाम धर्म के नाम पर लगातार घोर अत्याचारों का सामना करना पड़ रहा है। लाखों को हिंदुस्तान आना पड़ा।आज उनकी संख्या 30 प्रतिशत से घट कर मुश्किल से आठ  प्रतिशत ही बची है।अनेक लोग या तो कत्ल किये गए, या धर्म परिवर्तित किये गए या भाग कर उन्होंने भारत में शरण ली।दलित नेताओं के बहकावे में आ कर वे न इधर के रहे न उधर के।कैसी विडंबना है कि इन प्रताड़ित गरीब दलितों को भारतीय नागरिकता देने के कानून का भी अब  बड़े पैमाने पर इंडी गठबंधन द्वारा विरोध प्रायोजित किया जा रहा है।

जोगेंद्र नाथ मण्डल का मोहभंग क्यों हुआ,जानिए उनके  तत्कालीन प्रधान मंत्री को भेजे गए इस्तीफे के कुछ अंश :

मंडल ने अपने खत में पाकिस्तान में दलितों पर हुए अत्याचार की कई घटनाओं जिक्र किया उन्होंने लिखा, ‘गोपालगंज के पास दीघरकुल (Digharkul ) में मुस्लिम की झूंठी शिकायत पर स्थानीय नमोशूद्राय लोगो के साथ क्रूर अत्याचार किया गया । पुलिस के साथ मिलकर मुसलमानों ने मिलकर शूद्र समाज के लोगो को पीटा, घरों में छापे मारे । एक गर्भवती महिला की इतनी बेरहमी से पिटाई की गयी कि उसका मौके पर ही गर्भपात हो गया निर्दोष हिन्दुओ विशेष रूप से पिछड़े व दलित समुदाय के लोगो पर सेना और पुलिस ने भी हिंसा को बढ़ावा दिया । सयलहेट जिले के हबीबगढ़ में निर्दोष पुरुषो और महिलाओं को पीटा गया । सेना ने न केवल शूद्र लोगो को पीटा बल्कि हिंदू पुरुषो की महिलाओं को सैन्य शिविरों में भेजने के मजबूर किया ताकि वो सेना की कामुक इच्छाओं को पूरा कर सके । मैं इस मामले को आपके संज्ञान में लाया था, मुझे इस मामले में रिपोर्ट के लिये आश्वस्त किया गया लेकिन रिपोर्ट नहीं आई ।

खुलना (Khulna) जिले कलशैरा (Kalshira) में सशस्त्र पुलिस, सेना और स्थानीय लोगो ने निर्दयता से पुरे गाँव पर हमला किया । कई महिलाओं का पुलिस, सेना और स्थानीय लोगो द्वारा बलात्कार किया गया । मैने 28 फरवरी 1950 को कलशैरा और आसपास के गांवों का दौरा किया । जब मैं कलशैरा में आया तो देखा यहाँ जगह उजाड़ और खंडहर में बदल गयी । यहाँ करीबन 350 घरों को ध्वस्त कर दिया गया । मैंने तथ्यों के साथ आपको सूचना दी ।

ढाका में नौ दिनों के प्रवास के दौरान में दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा किया । ढाका नारायणगंज और ढाका चंटगाँव के बीच ट्रेनों और पटरियों पर निर्दोष हिन्दुओ की हत्याओं ने मुझे गहरा झटका दिया । मैंने ईस्ट बंगाल के मुख्यमंत्री से मुलाकात कर दंगा फसाद को रोकने के लिये जरूरी कदमों को उठाने का आग्रह किया । 20 फरवरी 1950 को मैं बरिसाल (Barisal) पहुंचा  यहाँ की घटनाओं के बारे में जानकर मैं चकित था।मेरी शिकायतों पर कोई ध्यान नही दिया गया। ढाका में नौ दिनों के प्रवास के दौरान मैंने दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा किया । ढाका नारायणगंज और ढाका चंटगाँव के बीच ट्रेनों और पटरियों पर निर्दोष हिन्दुओ की हत्याओं ने मुझे गहरा झटका दिया । मैंने ईस्ट बंगाल के मुख्यमंत्री से मुलाकात कर दंगा फसाद को रोकने के लिये जरूरी कदमों को उठाने का आग्रह किया। यहाँ बड़ी संख्या में हिन्दुओ को जला दिया गया । उनकी बड़ी संख्या को खत्म कर दिया गया । मैंने जिले में लगभग सभी दंगा प्रभावित इलाकों का दौरा किया । मधापाशा (Madhabpasha) में जमींदार के घर में 200 लोगो की हुई और 40 घायल थे । एक जगह है मुलादी (Muladi ), प्रत्यक्षदर्शी ने यहाँ भयानक नरक देखा । यहाँ 300 लोगो का कत्लेआम हुआ । वहां गाँव में शवो के कंकाल भी देखे नदी किनारे गिद्द और कुत्ते लाशो को खा रहे थे । यहाँ सभी पुरुषो की हत्याओं के बाद लड़कियों को आपस में बाँट लिया गया । राजापुर में 60 लोग मारे गये । बाबूगंज (Babuganj) में हिन्दुओ की सभी दुकानों को लूट आग लगा दी गयी ईस्ट बंगाल के दंगे में अनुमान के मुताबिक 10000 लोगो की हत्याएं हुई । अपने आसपास महिलाओं और बच्चो को विलाप करते हुए मेरा दिल पिघल गया । मैंने अपने आप से पूछा, ‘क्या मै इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान आया था ।”

  हिन्दुओ द्वारा बेचे गये सामान की मुसलमान खरीददार पूरी कीमत नहीं दे रहे हैं । तथ्य की बात यह है पाकिस्तान में न कोई न्याय है, न कानून का राज इसीलिए हिंदू चिंतित हैं ।

पूर्वी पाकिस्तान के अलावा पश्चिमी पाकिस्तान में भी ऐसे ही हालात हैं । विभाजन के बाद पश्चिमी पंजाब में 1 लाख पिछड़ी दलित जाति के लोग थे उनमे से बड़ी संख्या को बलपूर्वक इस्लाम में परिवर्तित किया गया है ।मुझे एक लिस्ट मिली है जिसमे 363 मंदिरों और गुरूद्वारे मुस्लिमों के कब्जे में हैं । इनमे से कुछ को मोची की दुकान, कसाईखाना और होटलों में तब्दील कर दिया है मुझे जानकारी मिली है सिंध में रहने वाली पिछड़ी,शूद्र जाति की बड़ी संख्या को जबरन मुसलमान बनाया गया है । इन सबका कारण एक है । हिंदू धर्म को मानने के अलावा इनकी कोई गलती नहीं है ।

मंडल ने अपने खत में आगे लिखा, ‘ईस्ट बंगाल में आज क्या हालात हैं? विभाजन के बाद 5 लाख हिन्दुओ ने देश छोड़ दिया है । मुसलमानों द्वारा हिंदू वकीलों, हिंदू डॉक्टरों, हिंदू व्यापारियों, हिंदू दुकानदारों के बहिष्कार के बाद उन्हें आजीविका के लिये पलायन करने के लिये मजबूर होना पड़ा । मुझे मुसलमानों द्वारा पिछड़ी जाति की लडकियों के साथ बलात्कार की जानकारी मिली है ।

जोगेंद्र नाथ मंडल ने अंत में लिखा, ‘पाकिस्तान की पूर्ण तस्वीर तथा उस निर्दयी एवं कठोर अन्याय को एक तरफ रखते हुए, मेरा अपना तजुर्बा भी कुछ कम दुखदायी, पीड़ादायक नहीं है । आपने अपने प्रधानमंत्री और संसदीय पार्टी के पद का उपयोग करते हुए मुझसे एक वक्तव्य जारी करवाया था, जो मैंने 8 सितम्बर को दिया था । आप जानतें हैं मेरी ऐसी मंशा नहीं थी कि मै ऐसे असत्य और असत्य से भी बुरे अर्धसत्य भरा वक्तव्य जारी करूं । जब तक मै मंत्री के रूप में आपके साथ और आपके नेतृत्व में काम कर रहा था, मेरे लिये आपके आग्रह को ठुकरा देना मुमकिन नहीं था पर अब मै इससे ज्यादा झूठे दिखाबे तथा असत्य के बोझ को अपनी अंतरात्मा पर नहीं लाद सकता । मै यह निश्चय किया कि मै आपके मंत्री के तौर पर अपना इस्तीफे का प्रस्ताव आपको दूँ, जो कि मै आपके हाथों में थमा रहा हूँ । मुझे उम्मीद है आप बिना किसी देरी के इसे स्वीकार करेंगे ।

आज सत्ता के लोभी नेता दलितों को फिर से मुस्लिमों के साथ गलबहियां करने को प्रेरित कर रहै हैं!!! क्या वे बंगला देश में आज सभी हिंदुओं के साथ बड़े पैमाने पर हो रहे लूट, बलात्कार ,आगजनी व कत्ले आम से सबके लेंगे ? !!!

 

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

Related Articles

Back to top button