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आपातकाल भारत के महान लोकतंत्र पर कलंक:- बांठिया

ब्यूरो चीफ संतोष कुमार गर्ग बालोतरा राजस्थान
बालोतरा।
भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्य समिति सदस्य व व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक गणपत बांठिया ने 25 जून को जयपुर भाजपा प्रदेश कार्यालय में भाजयुमो द्वारा आपातकाल दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत कर आपातकाल में अपना जीवन न्यौछावर करने वाले लोगो को श्रदांजलि अर्पित की।
भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्य समिति सदस्य व व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक गणपत बांठिया ने कहा कि उस रक्त रंजित काला दिवस में मेरे परिवार ने भी कष्ट झेला है।देश के हजारों नेताओ के साथ मेरे पिताजी पूर्व विधायक स्व चम्पालालजी बाठिया को भी मीसा बन्दी के तहत जेल में डाल दिया गया था।वे जोधपुर जेल में रहे।बांठिया ने कहा कि 25 जून 1975 की रात्रि को देश के लोगो को कुचलने का जो कृत्य तत्कालीन केंद्र की कांग्रेस सरकार ने कीया। इस आदेश से 21 महीने के युग की शुरुआत हुई जिसमें प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लोकतंत्र और मानवाधिकारों के सभी सिद्धांतों का उल्लंघन करके देश पर शासन करने का निरंकुश अधिकार मिल गया। इंदिरा गांधी के राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाल दिया गया, और मीडिया ने अपनी प्रेस की स्वतंत्रता खो दी और सेंसरशिप के अधीन हो गए।इंदिरा गांधी ने देश को जलती भट्टी में डाल दिया। उन्होंने प्रेस की आजादी छीन ली गई व नागरिकों के अधिकार छीन लिए गए।उस दौरान पुलिसिया प्रताड़ना चरम सीमा पार कर दी गई थी।उन्होंने ने कहा की लोकतंत्र के चारों स्तंभ चाहे वह न्यायपालिका हो या फिर मीडिया सभी का दमन किया गया था।आपातकाल के 21 महीने भारत के लोगों ने इमरजेंसी झेली थी।संविधान की धारा 352 के अधीन आपातकाल की घोषणा की गई थी।स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह सबसे विवादास्पद और अलोकतांत्रिक काल था।

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