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प्रकृति का मत करो शोषण इससे होता हमारा पोषण : ब्रह्माकुमारी सीता बहनजी
पेड़-पौधे मत करो नष्ट, सांस लेने में होगा कष्ट- बहन जी

लोकेशन=पन्ना
ब्यूरो चीफ=सुधीर अग्रवाल
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय में *’विश्व पृथ्वी दिवस’* पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बहन जी ने सभी को पृथ्वी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पृथ्वी दिवस एक वार्षिक आयोजन है जिसे पूरी दुनिया में 22 अप्रैल को पर्यावरण संरक्षण की जागृति के लिए 192 देश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करके मनाया जाता है। वर्ष 1970 से पृथ्वी दिवस को मनाया जा रहा है। यह भूमि हमारी जननी है इसकी रक्षा करना, इसको सुरक्षित रखना हम सबका कर्तव्य है। सवेरे जागते ही धरती मां को नमन करने की संस्कृति हमारी ही है। पृथ्वी हमारी माता है, पूरे ब्रह्मांड में कहीं पर भी पृथ्वी के बिना जीवन यापन असंभव है, क्योंकि जीवन की निरंतरता के लिए आवश्यक प्रत्येक महत्वपूर्ण संसाधन जैसे कि ऑक्सीजन, पानी, वायु इत्यादि केवल सृष्टि पर ही उपलब्ध है लेकिन आज मनुष्य की अनैतिकता के कारण पृथ्वी अपनी ही संरचना को नष्ट कर रही है हमारे ही कर्मों ने आज पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवो के जीवन को संकट में डाल दिया है। संपूर्ण विश्व में व्याप्त विषाक्त वातावरण वायु जल एवं ध्वनि प्रदूषण ग्लोबल वार्मिंग वनों की कटाई तथा प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग इत्यादि पर्यावरण के विषयों पर ध्यान देना अति आवश्यक हो गया है। हमें पृथ्वी को बचाने के लिए अपने अप्राकृतिक जीवन में शीघ्र ही बदलाव लाने की बहुत आवश्यकता है। *”धरती मां की पुकार सुनो : मैं धरती हूं तुम सब की मां* तुम्हारी प्यास बुझाने के लिए जिसने पानी उपलब्ध कराया, पानी के लिए नदियां उपलब्ध कराई, सांस लेने के लिए हवा, भूख मिटाने के लिए अन्न उपलब्ध कराया, अन्न के लिए जमीन और उस पर लहराती फसले उपलब्ध कराई, हमेशा सूरज के तप को बर्फ की पहाड़ियों की शीत को सहनकर अपनी धुरी पर दिन-रात दौड़ने वाली अंतरिक्ष की परिक्रमा करने वाली आज उसी मां की यह हालत हो चुकी है कि कंक्रीट के जंगलों के भार से ज्यादा व्यक्ति की लालच से हिल रही हूं। मानव की मनमानी चाहतों और महत्वाकांक्षाओं से आज धरती मां डसी जा रही हूं, मानव आकाश में आशियाने बनाता जा रहा है और मैं धरती मां होकर भी नीचे धसती जा रही हूं।
आगे आपने सभी को अपने-अपने घरों में गृह वाटिका लगाने की प्रेरणा दी और कहा कि कहीं भी जगह हो जरूर पेड़ लगाने की मेहनत करनी है लेकिन सिर्फ लगाना ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि उस वृक्ष की बच्चे जैसी संभाल भी करनी है। अंत में सभी ने वृक्षारोपण किया एवं पर्यावरण को बचाने के लिए प्रतिज्ञा की कि- हम अपनी धरती को प्रदूषित होने से बचाएंगे, प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे, पानी बचाएंगे, बिजली बचाएंगे, पेड़ लगाएंगे, पेड़ बचाएंगे, धरती को शक्तिशाली बनाएंगे, स्वच्छ भारत बनाएंगे, स्वर्णिम भारत बनाएंगे।

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