
आशुतोष शास्त्री
09 मार्च 2024, जयपुर।
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर, त्रिवेणी नगर, गोपालपुरा बायपास, जयपुर में आयोजित हो रहे 20वें अखिल भारतीय रूपक महोत्सव 2024 के चतुर्थ दिवस की जानकारी देते हुए रूपक महोत्सव कार्यक्रम संयोजक प्रो. कुलदीप शर्मा ने मंचित हुए नाटकों के बारे में बताते हुए कहा कि परिसर में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर के पूर्व छात्रों द्वारा कथा पन्नाधाय री (बलिदान) नाटक का मंचन किया गया। पद्मश्री अनुपमा होसकेरे द्वारा पुतलिका कठपुतली नाटक का मंचन किया गया। कठपुतली शो को देखखर दर्शक हुये रोमांचित । रूपक महोत्सव के सम्पूर्ति समारोह के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा, लोकायुक्त राजस्थान सरकार थे । अध्यक्षता प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी कुलपति केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली ने की। विशिष्ट अतिथि पद्मश्री अनुपमा होसकेरे,जयपुर परिसर निदेशक प्रो सुदेश कुमार शर्मा, प्रो गायत्री मुरली कृष्णा कुलसचिव केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली, प्रो मधुकेश्वर भट्ट निदेशक केन्द्रीय योजना थे । प्रो वाई एस रमेश संयोजक अखिल भारतीय रूपक महोत्सव प्रो रामकुमार शर्मा सह संयोजक नाट्य समिति थे । सर्वप्रथम सरस्वती पूजा अर्चना के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। जयपुर परिसर निदेशक प्रो सुदेश कुमार शर्मा ने चार दिवसीय रूपक महोत्सव के बारे में जानकारी दी। मुख्य अतिथि प्रताप कृष्ण लोहरा ने सम्बोधित करते हुये कहा कि केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय संस्कृत के संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रहा है रंगमंच के माध्यम से नाटक करने वाले रंग कर्मी को उचित प्लेटफार्म मिलता है। बहुत से कलाकारों का उदय नाटक से हुआ है संस्कृत भाषा व्यापक है इसमें दिवचन होता है यह सबसे लोकप्रिय वैज्ञानिक भाषा है इसके प्रचार प्रसार की आवश्यकता है। संस्कृत को गति मिलेगी तो देश की प्रगति होंगी समापन समारोह की अध्यक्षता कर रहे प्रो कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी ने सम्बोधित करते हुये कहा की ऐसे कार्यक्रमों से विश्वविद्यालय की छुपी प्रतिभा इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनो से बाहर आती है विश्वविद्यालय अपने छात्रों को वेश्विक धरातल पर राष्ट्र की प्रतिभाओ के रूप में प्रस्तुत करने हेतु प्रयासरत है आज संस्कृत भाषा जन भाषा बन चुकी है सभी भाषाये इससे जुडी हुई है केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय रोजगार मुखी पाठ्यक्रम शुरू कर ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर प्रदान किये जायेंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में अपना उद्बोधन देते हुए कहा कि हमारी प्राचीन ज्ञान परम्परा में नीति के सारे मूल्य प्राप्त होते हैं। उन्हें रमणीय माध्यम से समाज को शिक्षा देने का रुचिकर प्रकल्प है। होसकेरे विगत 35 वर्षों से कठपुतली कर रही है इस कला को करते करते रामायण के प्रसंग उपनिषदो की शिक्षाप्रद कथाये महाभारत के कथानक आदि विश्व के 25 से अधिक देशो में प्रस्तुत करके भारत की कला को वेश्विक धरातल पर लोकप्रिय का कार्य किया। परिसर मीडिया प्रभारी डॉ रानी दाधीच ने बताया की इस अवसर पर युजीसी के संयुक्त सचिव डॉ मंथा श्रीनिवास संस्कृत एप्प के लिए प्रसिद्ध प्रो मदन मोहन झा प्रो. अर्कनाथ चौधरी, पूर्व निदेशक, जयपुर परिसर, प्रो. श्रीधर मिश्र, निदेशक जम्मू परिसर, प्रो. भगवती सुदेश, पूर्व निदेशक, जयपुर परिसर प्रो. शिवकान्त झा, प्रो. विष्णुकान्त पाण्डेय, प्रो. कृष्णा शर्मा,डॉ लोकेश शर्मा डॉ. लोकेश कुमार गुप्ता, डॉ. नमित्ता मित्तल, डॉ. धर्मपाल प्रजापत, , डॉ. सुभाष चन्द्र मीना डॉ कैलाश चंद सैनी सहित सैकड़ों संस्कृत विद्वान् एवं अनुरागी उपस्थित थे।

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