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भारतीय ज्ञान परंपरा के बोध से बनेगा विकसित भारत- प्रो.टंकेश्वर कुमार

ब्यूरो चीफ सतीश कुमार महेंद्रगढ़ हरियाणा

 

*नारनौल टुडे न्यूज़*

*आईआईएम सिरमौर निदेशक प्रो.प्रफुल्ल वाई अग्निहोत्री मुख्य अतिथि के रूप हुए शामिल यंरंविशिष्ठ अतिथि के रूप में सीबीएलयू के कुलपति*

*प्रो.आर.के.मित्तल व प्रो.आरके अनायत ने किया संबोधित ध्यान*

*हकेवि में आईसीएसएसआर के सहयोग से वाणिज्य एवं प्रबंधन में भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू*
हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ में वाणिज्य एवं प्रबंधन में भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय की शुरूआत गुरूवार को हो गई। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद् (आईसीएसएसआर) के सहयोग से आयोजित इस संगोष्ठी के उद्घाटन जनसत्र को मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय प्रबंधन संस्थान सिरमौर, हिमाचल प्रदेश के निदेशक प्रोफेसर प्रफुल्ल वाई अग्निहोत्री ने संबोधित किया। जबकि विशिष्ठ अतिथि के रूप में चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू) के कुलपति प्रो.आर.के.मित्तल व दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.आरके अनायत ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के प्रोफेसर पवन शर्मा उपस्थित रहे जबकि उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.टंकेश्वर कुमार ने की और इस मौके पर सम कुलपति प्रो.सुषमा यादव, विश्वविद्यालय की प्रथम महिला प्रो.सुनीता श्रीवास्तव भी उपस्थित रही।
*विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.टंकेश्वर कुमार ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में आयोजन में सम्मिलित सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हैै। युवा इस दिशा में तभी आगे बढ़ सकते है, जबकि वो हमारे पुरातन ज्ञान परंपराओं को समझेंगे। कुलपति ने कहा कि अब समय आ गया है कि भारतीय अपने सही इतिहास को जाने और उसे समझकर आगे बढ़ें। कुलपति ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास हेतु जारी विभिन्न प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति को केंद्र में रखकर निरंतर भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ प्रगति के पथ पर अग्रसर है।*
इससे पूर्व में मुख्य अतिथि प्रो.प्रफुल्ल वाई अग्निहोत्री ने विस्तार से भारतीय ज्ञान परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने आयुर्वेद, भारतीय नाट्यशास्त्र, दर्शनशास्त्र का उल्लेख करते हुए बताया कि हम पुरातनकाल में कितने समृ़द्ध रहे हैं। उन्होंने कहा कि वेदों को ज्ञान का असीम भंडार बताते हुए युवाओं को उनके अध्ययन के लिए प्रेरित किया। सीबीएलयू के कुलपति प्रो.आरके मित्तल ने पुरातन काल में व्यापार, आपसी सहयोग, सर्वजन के विकास, भारतीय लघु उद्योगों के महत्व और सनातन चिंतन का विस्तार से उल्लेख करते हुए भारत के विकास में योगदान देने के लिए युवाओं को प्रेरित किया। दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.आरके अनायत ने बेहद थोडे़ शब्दों में भारतीय ज्ञान परंपरा और चिंतन को प्रतिभागियों के समक्ष प्रस्तुत किया।
*उद्घाटन सत्र के मुख्य वक्ता चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के प्रोफेसर पवन शर्मा ने बेहद विस्तार से भारतीय शिक्षा प्रणाली को अंग्रेजी शासन द्वारा पहुंचाए गए नुकसान और उसके कारणों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 के बाद से स्थितियां बदल रही है और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 में मातृभाषा में शिक्षा, भारत ज्ञान परंपरा के अध्ययन पर जोर इस बात का प्रमाण है कि हम अब पुनः विश्व स्तर पर अपनी वहीं पुरातन पहचान को प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है। प्रो. पवन शर्मा ने भारतीय वेद पुराणों और उनमें वणर््िात ज्ञान की ओर भी सभी का ध्यान आकर्षित किया। विश्वविद्यालय की सम-कुलपति प्रो.सुषमा यादव ने कहा कि आज हम अमृतकाल में जी रहे हैं और ऐसे में भारतीय ज्ञान परंपरा को जानते समझते हुए ही विकसित भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सकता हैं। उन्होंने आयोजन में सम्मिलित विशेषज्ञों के द्वारा प्रस्तुत विचारों को इस दिशा में मार्गदर्शक बताया। कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्जवलन के साथ हुई। जिसके पश्चात् वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष व संगोष्ठी के संयोजक डॉ. राजेंद्र मीणा ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों व प्रतिभागियों का स्वागत किया।*
संगोष्ठी का आयोजन सचिव डॉ. सुनीता तंवर अपने संबोधन में दो दिवसीय संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसकी आवश्यकता व महत्व पर प्रकाश डाला। स्कूल आफ बिजनेस एंड मैनेजमेंट स्टडीज संकाय के अधिष्ठाता प्रोफेसर रंजन अनेजा ने अपने संबोधन मे सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए इस संगोष्ठी के उद्देश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी प्रमुख रूप भारतीय ज्ञान परंपरा को समझते हुए वैश्विक स्तर पर विकास हेतु युवा पीढ़ी के निर्माण पर जोर देती। अवश्य ही यह आयोजन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित होगा। आयोजन के दौरान मंच का संचालन शिक्षक शिक्षा विभाग के प्रोफेसर नंद किशोर ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी की सह संयोजक डॉ. दिव्या ने प्रस्तुत किया।
*इस अवसर पर प्रो.आनंद शर्मा, प्रो.राजीव कौशिक, प्रो.आशीष माथुर, डॉ.कामराज सिंधू, संगोष्ठी के सह संयोजक डॉ. सुमन, डॉ. रविंद्र कौर, डॉ. भूषण, और डॉ. अजय कुमार प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।*

Satish Kumar

Beauro Chief Mahendragarh Haryana

Satish Kumar

Beauro Chief Mahendragarh Haryana

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