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प्रभू श्रीराम के नाम पर राजनीति करने वाले उनके आदर्शों का करें अनुसरण-चन्द्रमणि पाण्डेय

जशोदाबेन मोदी के साथ ही प्रधानमंत्री जी द्वारा प्राण-प्रतिष्ठा किया जाना होगा धर्मोचित

संवाददाता सचिन कुमार कसौधन बस्ती

 

*धार्मिक अनुष्ठान व धर्म का प्रचार प्रसार सरकार नहीं धर्माचार्यों द्वारा सर्वथा उचित*

मंदिर आन्दोलन से छात्र जीवन से ही जुड़े समाजसेवी चन्द्रमणि पाण्डेय सुदामा ने आज श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा जैसे धार्मिक अनुष्ठान को धर्माचार्यों द्वारा करायें जाने को उचित बताते हुए कहा कि यदि माननीय प्रधानमंत्री जी उक्त कार्य को करें तो जशोदाबेन मोदी जी को साथ लेकर करें जो कि सनातन धर्म की मान्यता के अनुरूप होगा उन्होंने कहा कि धर्म आधारित राजनीति से राष्ट्र का उत्थान होता है किन्तु राजनीति आधारित धर्म से धर्म के प्रति लोगों की भावनाएं आहत होती हैं जिसका राष्ट्र व उसके निवासियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में हमारे देश में धर्म की दशा दिशा धर्माचार्यों की जगह राजनेता तय कर रहे हैं कोई सनातन धर्म पर विषवमन कर रहा है तो कोई सनातन धर्म का प्रणेता बनकर अपनी राजनीति को मजबूत कर रहा है। भगवान राम व माता सीता ने प्रजाहित राजसत्ता त्याग दिया था किन्तु आज राजसत्ता हेतु प्रजा हित का त्याग हो रहा है। राम रामायण व सनातन धर्म पर अंगुली उठाने वाले खुले आम मंच से विषवमन कर रहे हैं तो सरकार प्रभू राम के आदर्शों के विपरीत कार्य सम्पादन कर सनातनी मान्यताओं को तार तार कर रही जिस पर हमारे अधिकांश धर्म व वेद के ज्ञानी आचार्य,धर्माचार्य व संत शिरोमणि मौन हैं। कोविड काल में मंदिर में प्रवेश वर्जित किया गया किन्तु मधुशाला में प्रवेश को छूट दिया गया जिसपर संत समाज चुप रहा,चैत मास में रामनवमी की जगह लोकसभा चुनाव में फायदे के मद्देनजर समय से पूर्व मंदिर का लोकार्पण व प्राण-प्रतिष्ठा सरकार कराने जा रही है वो भी विप्र या संत समाज के हाथों से नहीं अपितु प्रधानमंत्री जी के हाथों से वो भी जिन प्रभू श्रीराम ने गुरूजनों के परामर्श अनुसार माता सीता की अनुपस्थिति में माता सीता की सोने की मूर्ति बगल में बिठाकर अश्वमेध यज्ञ कराया था उन्ही प्रभू श्रीराम के मंदिर का लोकार्पण व प्राण-प्रतिष्ठा मोदी जी अकेले करने जा रहे हैं। ऐसे में तो हमारे सनातन धर्म के धार्मिक अनुष्ठान बिना पत्नी के ही करने की परिपाटी बन जायेगी जो कि सनातन धर्म के मूल सिद्धांत व महिलाओं को देय बराबरी के अधिकार के विरुद्ध है। बड़े बड़े वेद के ज्ञानी संतों द्वारा यह तो बताया जाता है कि श्रीमद्भागवत कथा महिला व्यास द्वारा नहीं होना चाहिए किन्तु आज अधिकांश संत समाज के लोग यह नहीं बोल रहे हैं कि यदि मंदिर का भी उद्घाटन व प्राण-प्रतिष्ठा प्रधानमंत्री ही करेंगे तो धर्माचार्य क्या करेंगे माना कि संत समाज की उपस्थिति में माननीय प्रधानमंत्री जी उनके दिशा निर्देश के क्रम में उक्त कार्य संपादित करेंगे तो क्या बिना जशोदाबेन मोदी को साथ लिए उनके द्वारा इतना उत्तम कार्य निष्पादित करना उचित है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन से मैं मंदिर आन्दोलन से हृदय से जुड़ा व मंदिर निर्माण व व्यवस्था सुधार हेतु हमने पहला आमरण-अनशन किया ऐसे में अवध धाम अयोध्या में पूर्णतः की तरफ अग्रसर दिव्य भव्य मंदिर में हमारे आराध्य श्री रामलला सरकार विराजमान हों ये देश ही नहीं विश्व के कोटि कोटि सनातन धर्म में आस्था रखने वाले हिन्दू जनमानस के साथ साथ मेरे लिए अति प्रसन्नता का विषय है किन्तु उक्त कार्य सनातन धर्म की मान्यता के आधार पर हो तो अति उत्तम होगा।इस मौके पर प्रमुख रूप से चन्द्रप्रकाश तिवारी,विनय पाण्डेय,दिनेश पाल, कन्हैया लाल तिवारी , पशुपतिनाथ चतुर्वेदी, अवधेश बर्मा, अखिलेश चौधरी मौजूद रहे।

 

Sachin Kumar Kasudhan

Beauro Chief (Basti)

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Beauro Chief (Basti)

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