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विशेष अण्डर ट्रायल रिव्यू कमेटी अभियान 2023 की चतुर्थ बैठक आयोजित

संवाददाता संतोष कुमार बालोतरा राजस्थान
बाड़मेर, 02 नवम्बर। माननीय कार्यकारी अध्यक्ष, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा रिट संख्या 406/2013 रे-इन-हा्रूमन कन्डीशन्स में दिए गए आदेशों की पालना करते हुए विचाराधीन प्रकरणों में कारागृहों में निरूद्ध बंदियों के संबंध में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बालोतरा के सभागार में अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी की चतुर्थ बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें जिला कलक्टर, बालोतरा राजेन्द्र विजय, जिला कलक्टर, बाड़मेर के प्रतिनिधि अंजुम ताहीर शमा, जिला पुलिस अधीक्षक, बाड़मेर के प्रतिनिधि सत्येन्द्रपाल सिंह, जिला पुलिस अधीक्षक, बालोतरा के प्रतिनिधि श्रीमती नीरज शर्मा, जिला कारागृह, बाड़मेर के उपाधीक्षक वीरसिंह तथा उप कारागृह, बालोतरा के प्रभारी भंवरसिंह ने भाग लिया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बालोतरा के सचिव सिद्धार्थ दीप ने बताया कि माननीय राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार समय-समय पर जिला कारागृह, बाड़मेर व उप कारागृह, बालोतरा का निरीक्षण प्राधिकरण के सचिव द्वारा किए जाने के दौरान प्रत्येक बंदीगण से व्यक्तिशः संवाद किए जाने पर धारा 436ए सीआरपीसी, न्यायालयों द्वारा जमानत हो जाने पर बंदीगण द्वारा मुचलके पेश नहीं करने की स्थिति में स्वयं के मुचलके पर जमानत दिए जाने, राजीनामा योग्य प्रकरणों, धारा 436 सीआरपीसी, धारा 107,108,109,151 आई.पी.सी.में निरूद्ध बंदीगण, गंभीर बीमारी से ग्रसित बंदीगण तथा धारा 437(6) सीआरपीसी के तहत आने वाले बंदीगण की जानकारी प्राप्त की।
प्रत्येक न्यायालयों से विचाराधीन प्रकरणों की प्राप्त सूचनाओं व निरीक्षण के दौरान प्राप्त सूचनाओं को सम्मिलित करते हुए माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा प्रेषित प्रारूप के निर्देशानुसार गहन विचार-विमर्श किए जाने के पश्चात् धारा 436ए सीआरपीसी, न्यायालयों द्वारा जमानत हो जाने पर बंदीगण द्वारा मुचलके पेश नहीं करने वाले बंदियों के स्वयं के मुचलके पर रिहा किए जाने, राजीनामा योग्य प्रकरणों, मादक पदार्थों के प्रकरणों में 180 दिवस में आरोपपत्र पेश नहीं करने, धारा 107, 151 आई.पी.सी. में निरूद्ध बंदियों तथा धारा 437(6) सीआरपीसी के तहत आने वाले कुल 29 प्रकरणों में कमेटी द्वारा आधी या आधी से अधिक सजा भुगतने वाले बंदीगण को जमानत पर रिहा किए जाने, रिवाईज्ड जमानत आदेश, दोनों पक्षों के मध्य विधितः अपराध मंे समझौता, वैधानिक समय सीमा के भीतर आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किए जाने तथा परिवीक्षा अधिनियम व प्ली-बार्गेनिंग के प्रावधानों को दृष्टिगत रखते हुए संबंधित बंदीगण के अधिवक्तागण को कार्यवाही करने एवं विचारण न्यायालयों को उस पर सहानुभूति पूर्वक उक्त प्रावधानों के अन्तर्गत विचार किए जाने की अनुशंषा की गई।
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