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राम भी रूठा, राज भी रूठा — पश्चिमी राजस्थान की पुकार

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग

 

राम भी रूठा, राज भी रूठा — पश्चिमी राजस्थान की पुकार

पश्चिमी राजस्थान आज एक बेहद गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है।

एक तरफ मानसून की बेरुखी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में फसलें सूख रही हैं और कई क्षेत्रों में अकाल जैसी स्थिति बनती जा रही है। किसान और ग्रामीण समाज गंभीर चिंता और संकट से गुजर रहा है।

दूसरी तरफ प्रशासनिक बेरुखी के कारण बालोतरा-बिठूजा का औद्योगिक क्षेत्र पिछले लगभग तीन महीनों से बंद पड़ा है। इसका असर केवल उद्योगपतियों तक सीमित नहीं है। हजारों मजदूरों के रोजगार प्रभावित हुए हैं और किराना दुकानदारों, रेस्टोरेंट संचालकों, ट्रांसपोर्टरों, छोटे व्यापारियों तथा पूरे स्थानीय जनजीवन पर इसका व्यापक और गंभीर प्रभाव पड़ा है।

जानकारी के अनुसार CETP/ट्रीटमेंट व्यवस्था को बेहतर करने तथा अपनी कार्यप्रणाली में सुधार के प्रयास किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद उद्योगों को अपेक्षित रूप से संचालित करने के लिए राजस्थान सरकार और प्रशासन की ओर से आवश्यक सहयोग नहीं मिल पा रहा है।

सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि जब संगठित औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित ट्रीटमेंट व्यवस्था के माध्यम से पानी को उपचारित करके छोड़े जाने की व्यवस्था है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों और कृषि भूमि के आसपास छोटे-बड़े अनधिकृत औद्योगिक कार्य शुरू हो रहे हैं, जहाँ से रंगीन और प्रदूषित पानी सीधे खेतों में जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

सवाल यह है कि जब प्रदूषण रोकने के लिए स्थापित और नियंत्रित व्यवस्था को बंद किया जा रहा है, तो खुले एवं ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

यह स्थिति पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है और किसानों की जमीन तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी।

एक तरफ राजस्थान सरकार ‘Rising Rajasthan’ के माध्यम से देश-विदेश के निवेशकों को राजस्थान में उद्योग लगाने के लिए आमंत्रित कर रही है और रोजगार एवं औद्योगिक विकास की बात कर रही है।

लेकिन दूसरी तरफ पश्चिमी राजस्थान का दशकों पुराना स्थापित उद्योग लगातार संकट में है।

यदि यही स्थिति बनी रही तो उद्योग गुजरात, अन्य राज्यों और यहां तक कि दूसरे देशों की ओर स्थानांतरित होते जाएंगे। उद्योग के साथ रोजगार जाएगा, व्यापार जाएगा और अंततः पश्चिमी राजस्थान के लोगों का पलायन बढ़ेगा।

हम राजस्थान सरकार और भारत सरकार से विनम्र लेकिन दृढ़ निवेदन करते हैं कि:

बालोतरा-बिठूजा के बंद पड़े उद्योगों को पर्यावरणीय नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करते हुए शीघ्र पुनः प्रारंभ कराया जाए।

CETP/CPT ट्रस्ट को आवश्यक तकनीकी एवं प्रशासनिक सहयोग तथा स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएँ, ताकि उद्योग भी चले और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे।

साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही अनधिकृत एवं प्रदूषणकारी औद्योगिक गतिविधियों पर भी समान रूप से कठोर कार्रवाई की जाए। पर्यावरण के नियम किसी एक क्षेत्र या उद्योग के लिए अलग और दूसरे के लिए अलग नहीं होने चाहिए।

हम उद्योग को बिना नियमों के चलाने की मांग नहीं कर रहे हैं।

हमारी मांग स्पष्ट है—

उद्योग नियमों के अनुसार चले, पानी निर्धारित मानकों के अनुसार ट्रीट हो, पर्यावरण सुरक्षित रहे और हजारों परिवारों का रोजगार भी बचाया जाए।

आज पश्चिमी राजस्थान के सामने दोहरी मार है—

आसमान से बारिश रूठी है और व्यवस्था से उद्योग।

इसीलिए आज हमारी पुकार है—

“राम भी रूठा, राज भी रूठा — अब सरकार पश्चिमी राजस्थान की सुध ले।”

बालोतरा का उद्योग केवल कुछ फैक्ट्रियों का विषय नहीं है।

यह हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी, लाखों लोगों की अर्थव्यवस्था और पूरे पश्चिमी राजस्थान के भविष्य का सवाल है।

हम सरकार से अपील करते हैं कि इस गंभीर परिस्थिति को संवेदनशीलता से समझते हुए पर्यावरण संरक्षण और रोजगार—दोनों के बीच संतुलन बनाकर बालोतरा-बिठूजा के उद्योगों को शीघ्र सुचारू रूप से प्रारंभ करने का प्रयाश करना चाहिए

आनन्द मेहता

जिलाध्यक्ष उद्योग एवं व्यापार प्रकोष्ठ कांग्रेस कमेटी।

Santosh Kumar Garg

Beauro Chief Balotra Rajasthan

Santosh Kumar Garg

Beauro Chief Balotra Rajasthan

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