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एडवोकेट डॉ. अशोक कुमार भाटी: व्यक्तित्व, विचार और सार्वजनिक जीवन की एक अनूठी मिसाल

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
आज हम बात कर रहे हैं एडवोकेट डॉ. अशोक कुमार भाटी की—एक ऐसे व्यक्तित्व की, जिनकी पर्सनेलिटी में “भोला” और “सयाना” दोनों गुण सहज रूप से समाहित हैं। फ्लेक्सिबल सोच और व्यावहारिक व्यवहार उनकी पहचान है, जो उन्हें सार्वजनिक जीवन में अलग स्थान दिलाता है।
डॉ. भाटी अब तक के सार्वजनिक जीवन में लगभग “अजातशत्रु” माने जाते हैं। पीएचडी धारक, एडवोकेट, प्रभावी संवाद प्रेषक, पूर्व भाजपा महामंत्री और व्याख्याता जैसे अनेक दायित्वों का निर्वहन कर चुके डॉ. भाटी जरूरत के अनुसार अपना परिचय स्वयं नहीं, बल्कि उनका काम प्रस्तुत करता है।
उनके जीवन की यात्रा 65 किलोमीटर से लेकर 234 किलोमीटर की दूरी तक फैली हुई है, लेकिन लक्ष्य स्पष्ट रहे हैं—जो पहले मिला, उसी की सवारी करेंगे, यानी अवसरवाद से अधिक प्रतिबद्धता पर विश्वास। सबके साथ नहीं, लेकिन पार्टी संगठन की विचारधारा के प्रति वे सदैव निष्ठावान रहे हैं।
लाल चौक में तिरंगा फहराने वाली ऐतिहासिक तिकड़ी—बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, बहुजन नेता कांशीराम और जननायक कर्पूरी ठाकुर—से प्रेरित डॉ. भाटी वंचित, पीड़ित और शोषित वर्ग के अधिकारों की बात मजबूती से रखते आए हैं।
उनकी एक विशेषता यह भी है कि वे सामने वाले को जरूरत के अनुसार “वेटेज” देते हैं। कई बार इसी आदत के कारण उन्हें नुकसान भी हुआ, लेकिन काम निकलवाने की कला उनमें इस कदर समाहित है कि न चाहते हुए भी सामने वाला काम करने को मजबूर हो जाता है।
“संगत” उनके व्यक्तित्व का मजबूत पिलर है, हालांकि यारी के पैरामीटर में डॉ. सुरेन्द्र सिंह के बाद ही किसी का नंबर आता है। लक्ष्य लेकर किसी को आगे बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर साइड करने की विधा में वे स्वभावगत रूप से निपुण माने जाते हैं।
विपरीत विचारधारा वालों से भी ढाई दशक से मित्रता निभाते आ रहे डॉ. भाटी, विपरीत सेतु में संतुलन बनाकर अपनों की राजनीतिक इच्छाओं की पूर्ति में कई बार सहायक साबित हुए हैं। ईमानदारी की कसौटी पर वे “100 टंच” खरे उतरते हैं।
अपने राजनीतिक और सामाजिक सफर में वे “प्रवक्ता” और “चाणक्य” जैसी भूमिकाओं का निर्वहन कर चुके हैं। हालांकि, स्वयं मानते हैं कि अंतिम सफलता अभी दूर है—और शायद यही अधूरापन उन्हें लगातार सक्रिय, सजग और संघर्षरत बनाए हुए है।
डॉ. अशोक कुमार भाटी का यह सफर बताता है कि राजनीति और समाज सेवा में संतुलन, विचारधारा और ईमानदारी आज भी मायने रखती है।

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